Home Morning News (खास खबरें)Platform Ticket: ट्रेन आधी रात पहुंची स्टेशन पर, सुबह तक वहीं रुकना होगा, लेना होगा प्लेटफॉर्म टिकट? – getting off the train at night have to stay at station till morning necessary to buy pft or not

Platform Ticket: ट्रेन आधी रात पहुंची स्टेशन पर, सुबह तक वहीं रुकना होगा, लेना होगा प्लेटफॉर्म टिकट? – getting off the train at night have to stay at station till morning necessary to buy pft or not

by BollywoodNewsAndMovie


Indian Railways Rule for Platform Ticket: रेल यात्रा में कई बार ऐसा होता है कि आपकी ट्रेन आधी रात को रेलवे स्टेशन पर पहुंचती है। रात में आप अपने घर या जहां जाना हो, वहां नहीं जा सकते हैं। आप सोचते हैं कि रात स्टेशन पर ही काट लें। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आपको प्लेटफॉर्म टिकट लेना होगा? जानते हैं रेलवे का नियम क्या कहता है।

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प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत(फोटोनवभारतटाइम्स.कॉम)
नई दिल्ली: आधी रात को तो दिल्ली जैसे महानगरों में भी बस या सार्वजनिक परिवहन के साधन नहीं मिलते। छोटे शहर या कस्बे की बात तो छोड़ ही दीजिए। सोचिए कि आपकी ट्रेन आधी रात में आपको स्टेशन पर उतारती है। उस समय आपको घर जाने के लिए कोई सवारी मिलने से रही। रिजर्व ऑटो या टैक्सी का किराया भरना आपके बूते की बात नहीं है। महिला हैं तो रात में ऑटो-टैक्सी में सफर करने पर सुरक्षा का भी मसला है। ऐसे में आप रात भर स्टेशन पर ही रहना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अलग से प्लेटफॉर्म टिकट लेना होगा? इस सवाल का जवाब आज हम यहां दे रहे हैं।

ऐसा हो सकता है

आपने भी ऐसा कई बार महसूस किया होगा कि लंबी दूरी की यात्रा करते हुए आपके स्टेशन पर ट्रेन देर रात को पहुंचती है। आप स्टेशन पर उतरते हैं और आपके घर या जहां आप जाना चाहते हैं, वहां तक के लिए सार्वजनिक परिवहन के साधन नहीं मिल रहे हैं। आपके पास रिजर्व टैक्सी या ऑटो करने लायक पैसे नहीं हैं। फिर सुरक्षा की भी बात है। ऐसे में कई यात्री सुबह होने तक रेलवे स्टेशन पर ही ठहरना उचित समझते हैं। ऐसे में आपके मन में सवाल उठता है कि रात भर ठहरने के लिए क्या प्लेटफॉर्म टिकट लेना होगा?

क्या कहता है रेलवे का नियम

रेलवे के नियमों के अनुसार कोई यात्री यदि देर रात ट्रेन से उतरता है। और वह अपनी सुरक्षा के लिए रेलवे स्टेशन पर रात बिताना चाहे तो उन्हें अलग से कोई टिकट या प्लेटफॉर्म टिकट खरीदने की आवश्यकता नहीं है। वह चाहे तो अपनी श्रेणी के अनुसार रेलवे के वेटिंग रूम या वेटिंग हॉल में जा कर समय गुजार सकता है। हां, यहां ध्यान यह रखना होगा कि आपको यात्रा का टिकट साथ रखना होगा। ताकि कोई टिकट चेकिंग स्टाफ या TC पूछे तो आप उन्हें स्थिति बता सकें।

प्लेटफॉर्म टिकट कब लेना होता है?

यदि आप किसी व्यक्ति को रेलवे स्टेशन छोड़ने जाते हैं या किसी व्यक्ति को रेलवे स्टेशन पर रिसीव करने जाते हैं। आप चाहते हैं कि अंदर ट्रेन में बिठाने जाएं या ट्रेन या रेलवे प्लेटफॉर्म पर जा कर अपने मित्र या रिश्तेदार को रिसीव करें। ऐसी स्थिति में आपको प्लेटफॉर्म टिकट लेना होगा।

प्लेटफॉर्म टिकट की कीमत

भारत में रेलवे स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म टिकटों की सामान्य कीमत 10 रुपये है। लेकिन कभी-कभी भेड़ को नियंत्रित करने के लिए रेल प्रशासन प्लेटफॉर्म टिकटों की बिक्री बंद कर देता है। कभी कभी इसके दाम भी बढ़ा देता है। श्रेणी के आधार पर कुछ बड़े स्टेशनों पर इसके दाम 30 रुपये से 50 रुपये तक हो सकते हैं।

प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता

प्लेटफॉर्म टिकट की वैधता या वेलीडिटी दो घंटे की होती है। मतलब कि जब आपने यह टिकट कटाया, उसके बाद दो घंटे तक आप इसे लेकर प्लेटफॉर्म पर या स्टेशन परिसर के आंतरिक हिस्सो में समय गुजार सकते हैं। यहां ध्यान रखने योग्य बात यह है कि प्लेटफॉर्म टिकट लेकर आप फर्स्ट क्लास वेटिंग रूम में नहीं बैठ सकते हैं। आपको प्लेटफॉर्म पर या फिर सेकेंड क्लास वेटिंग रूम में ही बैठना होगा।

शिशिर चौरसिया

लेखक के बारे मेंशिशिर चौरसियाशिशिर कुमार चौरसिया नवभारत टाइम्स डिजिटल (NBT.in) में बिजनेस एडिटर की भूमिका में हैं। उनके पास वित्तीय पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करने का 27 साल से भी अधिक का अनुभव है। वह मार्च 2020 में नवभारत टाइम्स से जुड़े और तभी से बिजनेस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। पत्रकारिता करियर के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार के वित्त, उद्योग एवं वाणिज्य, रेलवे समेत परिवहन के सभी साधनों, एनर्जी और कुछ अन्य आर्थिक बीट की सक्रिय रिपोर्टिंग की है। ढाई दशक से भी अधिक अवधि के दौरान चौरसिया ने अखबारों के डेस्क से लेकर नेशनल ब्यूरो तक में काम किया। उन्हें सात साल से ज्यादा समय तक देश की एक वायर न्यूज एजेंसी में भी काम किया है।
अनुभव
चौरसिया ने अपने पत्रकारिता करिअर की शुरुआत हिमाचल प्रदेश के अखबार दिव्य हिमाचल (1999-2000) से की। वहां करीब एक साल तक काम करने के बाद वह राजस्थान पत्रिका (2000-2001) के दिल्ली स्थित नेशनल ब्यूरो से जुड़ गए। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय संवाद समित यूनीवार्ता (2001-08) के दिल्ली कार्यालय में ज्वॉइन किया। इसके बाद वह दैनिक भास्कर (2008-14) के दिल्ली स्थित नेशनल ब्यूरो से जुड़े। वहां उन्हें इस समूह के पिंक अखबार बिजनेस भास्कर के नेशनल ब्यूरो में काम करने का मौका मिला। इसके बाद उन्होंने अमर उजाला (2014-2020) के दिल्ली स्थित नेशनल ब्यूरो का दामन थाम लिया। विभिन्न संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लगभग सभी आर्थिक मंत्रालयों की रिपोर्टिंग की।
विशेषज्ञता
शिशिर कुमार चौरसिया की विशेषज्ञता वित्तीय जगत के खबरों में है। वह अक्सर टैक्सेशन, ट्रांसपोर्ट, एनर्जी, शेयर बाजार, कमोडिटी मार्केट, कॉरपोरेट जगत आदि से जुड़ी वित्तीय खबरें और विश्लेषण करते रहते हैं। पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरों में तो महारात हासिल है।
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