Home ViralRajasthan Health Alert: बदलते मौसम में बढ़ा वायरल-फ्लू का खतरा, डॉक्टर ने बताए बचाव के जरूरी तरीके

Rajasthan Health Alert: बदलते मौसम में बढ़ा वायरल-फ्लू का खतरा, डॉक्टर ने बताए बचाव के जरूरी तरीके

by BollywoodNewsAndMovie


पाली. राजस्थान में इन दिनों मौसम के तेवर बेहद अजीब और मिजाज मिजाजी नजर आ रहे हैं. दिन में चिलचिलाती धूप और तेज गर्मी, रात होते-होते गुलाबी ठंड और बीच-बीच में अचानक आ रही बारिश… मौसम के इस ‘ट्रिपल अटैक’ ने आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं. तापमान में आ रहे इस उतार-चढ़ाव की वजह से प्रदेश के अस्पतालों में मरीजों की भारी भीड़ उमड़ रही है.

वायरल फीवर, फ्लू, डेंगू और अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (सांस की नली में संक्रमण) के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन सा वायरस आपको निशाना बना रहा है? इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इससे बचने के लिए आपको तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए? इन तमाम सवालों के जवाब और सेहत से जुड़े बेहद जरूरी हेल्थ टिप्स लेकर आए हैं राजस्थान के जाने-माने वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. आलोक गुप्ता.

सितंबर और मार्च में होते हैं ऐसे वायरस सक्रिय
बदलते मौसम के बीच मौसमी बीमारियों और संक्रमण का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आलोक गुप्ता ने आमजन को सतर्क रहने की सलाह दी है. उन्होंने बताया कि साल के कुछ महीने, विशेषकर सितंबर और मार्च, ऐसे होते हैं जब तापमान काफी अनुकूल रहता है. इस दौरान न तो ज्यादा सर्दी होती है और न ही ज्यादा गर्मी. यह अनुकूल मौसम बैक्टीरिया और वायरस के पनपने और सक्रिय होने के लिए सबसे मुफीद होता है.

यह वायरस हो जाते हैं सक्रिय
इस सीजन में फैलने वाली बीमारियों की जानकारी देते हुए गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में वायरस सबसे ज्यादा सक्रिय हैं. इनमें स्वाइन फ्लू से मिलते-जुलते फ्लू के वायरस, कोविड और रेस्पिरेटरी (श्वसन तंत्र) से जुड़े वायरस प्रमुखता से फैल रहे हैं. इसके साथ ही निमोकोकल बैक्टीरिया भी इस दौरान हावी रहता है. उन्होंने यह भी बताया कि कुछ वायरस ऐसे होते हैं, जो उल्टी और दस्त का कारण बनते हैं. ये वायरस अक्सर सादे या खराब पानी में पनपते हैं और इस मौसम में इनकी तादाद काफी ज्यादा होती है.

इन बातों का रखें विशेष ध्यान
आमजन को सलाह देते हुए डॉ. गुप्ता ने कहा कि भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें. जिन लोगों को खांसी या जुकाम है, उन्हें अनिवार्य रूप से मास्क लगाना चाहिए और दूसरों को भी एहतियात के तौर पर मास्क का उपयोग करना चाहिए. बाहर से घर लौटने पर साबुन से हाथ जरूर धोएं. खान-पान को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी पुरानी (बासी) या ऐसी चीज न खाएं, जिस पर खराब होने का संदेह हो. बाहर खाना खाते समय सावधान रहें, क्योंकि कई बार फूड हैंडलर्स (खाना परोसने वाले) के हाथ साफ नहीं होते या वे जिस पानी से प्लेट धोते हैं, वह पानी साफ नहीं होता. ऐसे में गंदे पानी और बर्तनों से इंफेक्शन का डर बना रहता है.

किस उम्र के बच्चों को विशेष ध्यान रखने की जरूरत
हाई-रिस्क लोगों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बहुत छोटे बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है. इसके अलावा, जो लोग पहले से ही डायबिटीज, निमोनिया, कमजोर किडनी, पथरी जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं या हार्ट और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयां ले रहे हैं, उन्हें मुख्य रूप से सतर्क रहना चाहिए. ऐसे लोगों को बाजार का खाना खाने और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से पूरी तरह बचना चाहिए. उन्होंने लोगों से यह भी आग्रह किया है कि यदि घर में किसी को खांसी-जुकाम या कोई इंफेक्शन है, तो वह बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं से सुरक्षित दूरी बनाकर रखे और घर में भी मास्क पहनकर रहे.

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