आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को दुनिया कई तरह से देखती है, लेकिन व्हाइट-कॉलर जॉब वालों के लिए ये एक डर है कि एक दिन जिस ऑफिस में वो जाते हैं, वहां उनकी अहमियत खत्म हो जाएगी. जिस जिम्मेदारी को वो पूरा कर रहे हैं, वो AI के हाथों में होगी और वो बेरोजगार हो जाएंगे.
उनका ये डर सही भी है, क्योंकि हर हफ्ते टेक कंपनियों से ले-ऑफ की खबरें आती हैं. AI एक्सपर्ट्स ये भी ऐलान कर चुके हैं कि भविष्य में वो काम ही रह जाएंगे, जिसमें इंसानी मेहनत हो, यानी ब्लू-कॉलर जॉब. जैसे प्लंबर, राजमिस्त्री और टेक्निशियन. लेकिन क्या ये पूरी तरह सच है?
ऐसे कई वीडियो वायरल हुए हैं, जो दिखाते हैं कि AI ब्लू-कॉलर जॉब में भी सेंध मारने की तैयारी कर रहा है. पिछले दिनों एक वीडियो वायरल हुआ था, जहां टेलर्स को चेहरे पर कैमरे लगाकर उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही थी. वायरल वीडियो में इसकी सच्चाई भी सामने आई थी.
अब इससे जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसे आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने शेयर किया है. वीडियो में एक हेयर ड्रेसर काम करता दिखाई देता है, जबकि एक AI-पावर्ड सिस्टम उसके काम करने के तरीके और हाथों की गतिविधियों को ट्रैक करता नजर आता है. वीडियो शेयर करते हुए हर्ष गोयनका ने लिखा, “AI ट्रेनिंग गोइंग ऑन इंडिया! क्या हेयर ड्रेसर की जॉब खतरे में है?”
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हालांकि, वीडियो को देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि हेयर ड्रेसर की नौकरी जल्द मशीनें करने लगेंगी. लेकिन यह जरूर दिखाता है कि AI की पहुंच अब उन कामों तक भी बढ़ रही है, जिन्हें लंबे समय से इंसानी अनुभव और हाथों की कुशलता से जोड़ा जाता रहा है.
हेयर ड्रेसर के काम को AI कैसे सीख सकता है?
हेयरकट करना सिर्फ कैंची चलाने का काम नहीं है. हेयर ड्रेसर को बालों की लंबाई, ग्राहक की पसंद, चेहरे के आकार और हेयर स्टाइल को देखकर लगातार छोटे-छोटे फैसले लेने पड़ते हैं. हाथों की मूवमेंट, प्रिसीजन और टाइमिंग भी इसमें अहम होती है.
AI या रोबोटिक्स सिस्टम किसी इंसान के काम करने के तरीके को कैमरों, सेंसर और दूसरे तकनीकी साधनों से रिकॉर्ड कर सकते हैं. इस डेटा का इस्तेमाल मशीन को किसी खास प्रक्रिया के बारे में सिखाने में किया जा सकता है.
यही पहलू इस वीडियो को दिलचस्प बनाता है. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि मशीन हेयरकट कर सकती है या नहीं. बड़ा सवाल यह है कि क्या AI इंसान के हुनर को देखकर उसकी प्रक्रिया सीख सकता है?
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AI की वजह से किन जॉब पर असर पड़ सकता है?
ऑटोमेशन की बहस पहले ज्यादातर फैक्ट्री और रिपीटिटिव जॉब्स को लेकर होती थी. फिर जेनरेटिव AI ने राइटिंग, कोडिंग, डिजाइन, रिसर्च और कस्टमर सपोर्ट जैसे व्हाइट-कॉलर कामों को भी प्रभावित करना शुरू किया.
अब रोबोटिक्स और कंप्यूटर विजन में प्रगति के साथ फिजिकल जॉब्स को लेकर भी चर्चा बढ़ रही है. मशीनों के लिए इंसान की तरह हाथों से सटीक काम करना अभी भी चुनौतीपूर्ण है, लेकिन टेक्नोलॉजी इस दिशा में आगे बढ़ रही है.
हर्ष गोयनका का वीडियो इसी बदलाव की ओर इशारा करता है. इसका मतलब यह नहीं कि हर हेयर ड्रेसर की जगह मशीन लेने वाली है. AI पहले किसी काम के कुछ हिस्सों को संभाल सकता है या प्रोफेशनल को काम करने में मदद दे सकता है.
क्या सच में खत्म हो जाएगी हेयर ड्रेसर की नौकरी?
फिलहाल ऐसा मानने की कोई वजह नहीं है. एक डेमोंस्ट्रेशन या वायरल वीडियो यह साबित नहीं करता कि AI-पावर्ड हेयरकट मशीनें बड़े स्तर पर इंसानों की जगह लेने के लिए तैयार हैं.
हर ग्राहक की जरूरत अलग होती है. बालों की टेक्सचर, सिर का आकार, पसंद और स्टाइल के हिसाब से हेयर ड्रेसर को मौके पर फैसले लेने पड़ते हैं. इसके अलावा ग्राहक और प्रोफेशनल के बीच कम्युनिकेशन और भरोसा भी इस काम का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
इसलिए फिलहाल AI को हेयर ड्रेसर का सीधा विकल्प मानने के बजाय एक ऐसी टेक्नोलॉजी के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा, जो भविष्य में इस काम के कुछ हिस्सों को ऑटोमेट या असिस्ट कर सकती है.
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वायरल वीडियो का बड़ा सवाल
इस वीडियो की अहमियत सिर्फ हेयरकट तक सीमित नहीं है. यह आने वाले समय की एक बड़ी चुनौती की तरफ इशारा करता है. अगर AI इंसानों के हाथों की मूवमेंट और उनके काम करने की टेक्नीक को लगातार बेहतर तरीके से सीखने लगे, तो उन प्रोफेशंस की संख्या बढ़ सकती है, जिन्हें कभी पूरी तरह ह्यूमन स्किल पर निर्भर माना जाता था.
यानी आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “AI कौन-सी नौकरी लेगा?” बल्कि यह भी होगा कि “इंसान और AI मिलकर कौन-से काम करेंगे?”
फिलहाल वायरल वीडियो को हेयर ड्रेसर की नौकरी के लिए खतरे का सीधा संकेत मानना सही नहीं होगा. लेकिन यह जरूर बताता है कि ऑटोमेशन की दुनिया अब सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन तक सीमित नहीं रही है.
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