Home Viralमौसम बदला तो वायरल बढ़ा: अस्पताल में रोज 600+ मरीज, 80 बच्चों में से 40 से 45 वायरल की चपेट में

मौसम बदला तो वायरल बढ़ा: अस्पताल में रोज 600+ मरीज, 80 बच्चों में से 40 से 45 वायरल की चपेट में

by BollywoodNewsAndMovie


शहर में दिन में गर्मी और रात में सर्दी के कारण मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। इसके साथ ही वायरल संक्रमण के मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। आबूरोड के उप जिला अस्पताल की ओपीडी में पिछले चार दिनों से रोजाना 592 से 710 मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

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बाल ओपीडी में आने वाले करीब 40 से 45 बच्चों में वायरल संक्रमण के लक्षण मिल रहे हैं। वहीं, बच्चों के अलावा करीब 100 से 120 मरीज रोजाना वायरल की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। ऐसे में अस्पताल की ओपीडी में वायरल संक्रमण से प्रभावित मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। अस्पताल के पीएमओ डॉ. पीएन गुप्ता ने बताया कि वायरल संक्रमण के मरीजों में मुख्य रूप से खांसी, बुखार, जुकाम, गले में खराश, कमजोरी और शरीर में दर्द जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विजेंद्र ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण बच्चों में भी बुखार, नाक बहना, खांसी और गले में संक्रमण की शिकायतें अधिक मिल रही हैं। मौसम में तापमान के उतार-चढ़ाव के कारण संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है। स्कूल जाने वाले बच्चों में इसका खतरा अधिक रहता है, क्योंकि वे एक-दूसरे के लगातार संपर्क में रहते हैं। उप जिला अस्पताल की बाल ओपीडी में रोजाना करीब 80 बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

इनमें से 40 से 45 बच्चों में वायरल संक्रमण के लक्षण मिल रहे हैं। बच्चों में बुखार, नाक बहना, खांसी और गले में संक्रमण की शिकायत प्रमुख रूप से सामने आ रही है। वहीं, अन्य मरीजों में भी बुखार के साथ खांसी-जुकाम के मामले अधिक हैं। तारीख ओपीडी 8 अक्टूबर 600 7 अक्टूबर 592 6 अक्टूबर 620 5 अक्टूबर 710 बाल मरीज: रोजाना करीब 80 वायरल से पीड़ित बच्चे: 40-45 अन्य वायरल मरीज: करीब 100-120 प्रमुख लक्षण: खांसी, बुखार, जुकाम, गले में खराश 4 दिन में अस्पताल की ओपीडी ये सावधानियां रखें : चिकित्सकों के अनुसार बदलते मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव से सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। बच्चों को ठंडी चीजों से बचाने, पर्याप्त पानी पिलाने और पौष्टिक आहार देने की सलाह दी गई है। बुखार, लगातार खांसी या अन्य लक्षण बने रहने पर चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए।



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