मेट्रो स्टेशन की लिफ्ट के बाहर व्हीलचेयर पर बैठे एक शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. वीडियो में दूसरे यात्री पहले लिफ्ट में सवार होकर चले जाते हैं, जबकि व्हीलचेयर यूजर को अगली लिफ्ट का इंतजार करना पड़ता है. इस छोटे से वीडियो ने सार्वजनिक जगहों पर दिव्यांग यात्रियों की आसान और बराबर पहुंच को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्या दिख रहा है VIDEO में?
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए इस वीडियो में @thewheelchairvlogs मेट्रो स्टेशन की लिफ्ट के बाहर अपनी बारी का इंतजार करते नजर आते हैं. सामने लिफ्ट आती है और कई यात्री उसमें सवार होकर चले जाते हैं. व्हीलचेयर पर मौजूद शख्स को इस दौरान लिफ्ट में जगह नहीं मिलती और उन्हें अगली लिफ्ट का इंतजार करना पड़ता है.
वीडियो का सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला हिस्सा यही है कि लिफ्ट मौजूद होने के बावजूद व्हीलचेयर यूजर को अपनी बारी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. देखने में यह एक सामान्य-सी स्थिति लग सकती है, लेकिन व्हीलचेयर से सफर करने वाले यात्री के लिए इसका अनुभव अलग हो सकता है.
देखें वीडियो
लिफ्ट होना ही काफी नहीं?
मेट्रो स्टेशनों पर लिफ्ट जैसी सुविधाएं दिव्यांग और बुजुर्ग यात्रियों के लिए बेहद जरूरी होती हैं. खासकर व्हीलचेयर यूजर्स के लिए सीढ़ियों या एस्केलेटर की जगह लिफ्ट ही सबसे आसान रास्ता हो सकती है.लेकिन यह वीडियो एक दूसरे पहलू की ओर भी ध्यान खींचता है. सुविधा उपलब्ध होना और उस सुविधा तक आसानी से पहुंच मिलना, दोनों अलग बातें हैं.
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अगर किसी स्टेशन पर लिफ्ट के बाहर ज्यादा भीड़ हो या दूसरे यात्री पहले उसमें चले जाएं, तो व्हीलचेयर यूजर को अगली लिफ्ट का इंतजार करना पड़ सकता है. ऐसे में कुछ मिनट का इंतजार भी उनके सफर को ज्यादा मुश्किल बना सकता है.
इस वीडियो को देखने के बाद लोग क्या कह रहे हैं
लोगों ने ये वीडियो देखकर गुस्से में भी नजर आए. लोगों की सिविक सेंस की भी शिकायत की. समाज की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाया. लेकिन कुछ ने दूसरों पर सवाल उठाने के बजाय व्यवस्था की कमी पर भी बात की. वहीं किसी ने नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा कि ये समाज सड़ चुका है, जहां एक दिव्यांग इंसान के लिए जरा सा भी संवेदनशीलता नहीं रह गई है.
इस वीडियो ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर किया है कि सार्वजनिक परिवहन में समान पहुंच का मतलब सिर्फ दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग सुविधा बना देना नहीं है. उस सुविधा का इस्तेमाल उन्हें बिना अनावश्यक परेशानी के मिल सके, यह भी उतना ही जरूरी है.
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