Home Viral‘उनकी क्रांति की आग आज भी जिंदा है’, शहीद भगत सिंह का पैतृक घर देख जोश से भर उठे लोग, बोले- वो अमर रहेंगे – fire is still alive creator shows shaheed bhagat singh ancestral home people exclaims legends never die

‘उनकी क्रांति की आग आज भी जिंदा है’, शहीद भगत सिंह का पैतृक घर देख जोश से भर उठे लोग, बोले- वो अमर रहेंगे – fire is still alive creator shows shaheed bhagat singh ancestral home people exclaims legends never die

by BollywoodNewsAndMovie


Shaheed Bhagat Singh Home: पंजाब के बंगा जिले के पास स्थित शहीद भगत सिंह के पैतृक घर की एक वीडियो ने इंटरनेट की जनता को जोश से भर दिया। वैसे भी भगत सिंह हमारे वो ‘हीरो’ है, जिनका नाम सुनकर आज की युवा पीढ़ी भी जोश से सराबोर हो उठती है। उनका घर देखने के बाद लोग उनके वहां होने की कल्पना कर रहे हैं।

Shaheed Bhagat Singh Ancestral Home
शहीद भगत सिंह का पैतृक घर देख जोश से भर उठे लोग
शहीद भगत सिंह हमारे हीरो है। उनके बलिदान को ना भूलाया जा सकता है, ना मिटाया जा सकता है! भगत सिंह के अलावा सुखदेव और राजगुरु ने भी हंसते-हंसते भारत की आजादी के लिए कुर्बानी दे दी थी। 28 सिंतबर को 1907 को बंगा गांव, लायलपुर (फैसलाबाद, आज का पाकिस्तान) में शहीद-ए-आजम का जन्म हुआ था। जनता आज भी उनके गांव और उनके घर को देखने में दिलचस्पी रखती है, तभी वीडियोज भी वायरल रहते हैं।

शहीद भगत सिंह का पैतृक घर!

शहीद भगत सिंह का पैतृक घर!

भारत के पंजाब के बंगा टाउन के खटकड़ कलां गांव में शहीद भगत सिंह का पैतृक गांव है। जहां जाकर लोगों को आज भी एक ‘फायर’ महसूस होता है। जिस हवेलीनुमा मकान को शरणदीप कौर ने अपने वीडियो में दिखाया है। उसे वर्तमान में एक संरक्षित राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया जा चुका है। बताया जाता है कि इसे 1858 में शहीद भगत सिंह के परदादा फतेह सिंह ने बनवाया था।

सुरक्षित निशानियां!

सुरक्षित निशानियां!

भगत सिंह के इस पैतृक घर में आज भी उनकी माता विद्यावती जी के द्वारा इस्तेमाल की गई पुरानी वस्तुएं रखी गई है। वीजियो में भी आपको घर में रखा बर्तन, चरखा, टाइपराइटर, अलमारी, लालटेन और अनाज पीसने वाली चक्की भी आज सुरक्षित रखी है। भगत सिंह जी के इस घर में पुराना कुआं और पारंपरिक चूल्हा उस दौर के ग्रामीण जीवन को दर्शाता है। शहीद-ए-आजम के घर को देखकर लोग कल्पना कर रहे हैं कि वह भी कभी वहां रहे होंगे।

क्या शहीद भगत सिंह इस घर भी आते थे?

भगत सिंह का जन्म जिस लायलपुर में हुआ था, फिलहाल वो पाकिस्तान में आता है। लेकिन वे अपने दादा अर्जुन सिंह के साथ स्कूल की छुट्टियां मनाने इस घर आया करते थे। आजादी और बंटवारे के बाद शहीद भगत सिंह की माता विद्यावती जी इस घर में लौट आई और लंबे समय तक यहां जीवन बिताया। 1 जून 1975 को उन्होंने इस घर में अंतिम सांस ली।
खैर, इस वीडियो को इंस्टाग्राम के जरिए शरणदीप कौर ने आप तक पहुंचाया है। कौर लिखती है कि 28 सितंबर 1907, वह दिन जब एक महान व्यक्ति का जन्म हुआ। शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि। साथ ही, पंजाब (भारत) के खटकर कलां में स्थित उनके पैतृक घर जरूर जाएं। उनकी क्रांति की आग आज भी जिंदा है।

हमारे सबसे बड़े आइडल!

हमारे सबसे बड़े आइडल!

शहीद भगत सिंह के जन्मदिन पर जनता उन्हें याद करके कमेंट सेक्शन में उन्हें शत-शत नमन करती नजर आ रही हैं। एक ओर जहां आज की जनता उन्हें अपना सबसे बड़ा मोटिवेशन और आइडल बता रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों का कहना है कि उनकी कुर्बानियों को देश हमेशा याद रखेगा। एक यूजर का कहना था कि ‘अपने वतन के लिए शहीद होने वाले कभी नहीं मरते। वो जिंदा रहते हैं, हमेशा हमारी यादों में, हमारे सपनों में, हमारी उम्मीदों में। हर पीढ़ियों के लिए वो किसी प्रेरणा से कम नहीं है।’

प्रखर पाण्डेय

लेखक के बारे मेंप्रखर पाण्डेयप्रखर पाण्डेय नवभारतटाइम्स.कॉम में सीनियर ड‍िज‍िटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं और पिछले 3.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वायरल जर्नलिज्म में विशेषज्ञता रखने वाले प्रखर ने अब तक 3100 से अधिक लेख लिखे हैं। वह सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X/Twitter, Reddit, Threads और Facebook) की नब्ज पहचानने में माहिर हैं। प्रखर की विशेषता केवल ट्रेंड्स को पकड़ना ही नहीं, बल्कि इंडियन रेलवे और ट्रेन यात्राओं से जुड़ी ऐसी ‘फ्रेश’ और ‘यूनिक’ खबरें सामने लाना है, जो सीधे आम आदमी के जीवन को प्रभावित करती हैं।प्रखर मानते हैं कि ‘वायरल’ होने का अर्थ केवल सनसनी फैलाना नहीं, बल्कि कंटेंट की गहराई और उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित करना है। यही कारण है कि वे किसी भी सोशल मीडिया स्टोरी को पब्लिश करने से पहले मूल सोर्स या पोस्ट करने वाले व्यक्ति से संपर्क कर उसकी सत्यता की जांच करते हैं। साल 2025 में उनके द्वारा कवर की गई ‘ढाबे पर फौजियों’ की कहानी इसका प्रमाण है, जिसने न केवल लोगों को दिल जीता, बल्कि अपनी विश्वसनीयता के कारण सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना भी पाई।एक Gen-Z लेखक होने के नाते प्रखर को आज की युवा पीढ़ी की पसंद और डिजिटल व्यवहार की गहरी समझ है। वे वायरल कंटेंट के ‘हल्केपन’ को कम करने के लिए उसमें मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सीख को पिरोते हैं, ताकि पाठक केवल खबर न पढ़ें, बल्कि उससे जुड़ाव महसूस करें। मनोरंजन, खेल और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर उनकी पैनी नजर उनके लेखों को अधिक सूचनात्मक और ट्रेंडी बनाती है।शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो प्रखर ने फिल्म सिटी स्थित गुलशन कुमार जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट (नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी से मान्यता प्राप्त) से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में BA किया है। इसके अलावा, उन्होंने प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) विश्वविद्यालय, प्रयागराज से राजनीति विज्ञान में MA की डिग्री हासिल की है। यह शैक्षणिक आधार उन्हें खबरों को राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से समझने में मदद करता है।नवभारत टाइम्स के साथ जुड़ने से पहले, प्रखर ने करीब पौने दो साल जागरण.कॉम में अपना योगदान दिया था, जहां उन्होंने स्पोर्ट्स, एस्ट्रो और लाइफस्टाइल जैसी विभिन्न बीट्स पर हजारों वेब स्टोरीज कवर कीं। प्रखर का उद्देश्य जटिल से जटिल खबर को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना है, ताकि वह हर आम आदमी के लिए उपयोगी साबित हो सके।… और पढ़ें