इकलौते कमाने वाले के जाने से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने की जिम्मेदारी बनी बड़ी चुनौती
नितिन पाल
बनीखेत (चंबा)। सुबह दिहाड़ी कमाने घर से निकले 49 वर्षीय देव राज ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि शाम को उनकी वापसी कफन में होगी। निर्माणाधीन इमारत में हुए हादसे ने परिवार से उसका इकलौता कमाने वाला सदस्य छीन लिया।
ग्राम पंचायत जियुंता के लाहड़ गांव निवासी देव राज पत्नी और तीन बच्चों के साथ पुश्तैनी मकान के छोटे से कमरे में रहते थे। परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उनकी दिहाड़ी से ही चलता था।
देव राज की मौत के बाद परिवार के सामने अब भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। वह अपने पीछे पत्नी, एक बड़ी बेटी और दो छोटे बेटों को छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी दसवीं तक पढ़ाई करने के बाद घर पर रहती है, जबकि दोनों बेटे आठवीं और दसवीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
हादसे की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। जिस घर में देव राज के लौटने का इंतजार हो रहा था, वहां शाम को उनका शव पहुंचते ही चीख-पुकार मच गई। परिजनों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सुबह परिवार का सहारा दिहाड़ी कमाने निकला था, लेकिन शाम को हमेशा के लिए खामोश होकर लौट आया।
