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Anjaan: गणित के शिक्षक से बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार बनने तक का सफर

by BollywoodNewsAndMovie


अंजान: गणित के शिक्षक से बॉलीवुड के दिग्गज गीतकार बनने तक का सफर

हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर में जिन गीतकारों ने अपनी कलम से आम आदमी के दिलों को छुआ, उनमें ‘अंजान’ का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता है। लालजी पांडेय, जिन्हें दुनिया अंजान के नाम से जानती है, ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों के लिए 1500 से ज्यादा सदाबहार गीत लिखे। उनके लिखे गानों में न केवल सादगी थी, बल्कि पूर्वांचल की माटी की सोंधी खुशबू और भोजपुरी मिठास भी घुली होती थी, जो आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर रहती है।

अंजान का जन्म उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ था। बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में आने से पहले उनका जीवन काफी संघर्षपूर्ण था। वे गणित के ट्यूशन पढ़ाकर अपना और अपने परिवार का गुजारा करते थे। हालांकि, साहित्य और कविता के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था। उनके परदादा राजाराम शास्त्री से मिली प्रेरणा ने उन्हें लेखन की दुनिया में आगे बढ़ने का हौसला दिया। बनारस की स्थानीय पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएं छपने लगीं और जल्द ही वे काव्य गोष्ठियों में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे। (जूम हिंदी पर यह भी पढ़ें: कृति खरबंदा का फिल्मी सफर: 150 लड़कियों को पछाड़कर मिला था पहला ब्रेक)

गणित के शिक्षक से बॉलीवुड के ‘सदाबहार’ गीतकार तक

अंजान ने साल 1953 में फिल्म ‘गोलकुंडा का कैदी’ के साथ हिंदी सिनेमा में अपने सफर की शुरुआत की। उनके गीतों की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे सीधे दिल को छू जाते थे। ‘दे दे प्यार दे’, ‘तेरे जैसा यार कहां’, ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ और ‘रोते हुए आते हैं सब’ जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया। 1970 और 80 के दशक में अमिताभ बच्चन की कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों के गानों को उन्होंने ही अपनी कलम से सजाया था।

विरासत और स्मृतियां

अंजान की विरासत को उनके पुत्र समीर (शीतला पांडेय) ने आगे बढ़ाया, जिन्होंने खुद बॉलीवुड में एक सफल गीतकार के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। अंजान के गीतों में प्यार, दर्द और जीवन की हकीकत का जो संगम मिलता था, वह उन्हें अन्य गीतकारों से अलग खड़ा करता था। 3 सितंबर 1997 को 67 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा रचित गीतों का खजाना आज भी हिंदी संगीत जगत की अमूल्य धरोहर है।



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