Home Morning News (खास खबरें)Dehradun News: फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS दाखिला, तीन और गिरफ्तार

Dehradun News: फर्जी प्रमाणपत्रों से MBBS दाखिला, तीन और गिरफ्तार

by BollywoodNewsAndMovie


ख़बर शेयर करें –

बेटियों के मेडिकल दाखिले के लिए फर्जी दस्तावेज बनवाने का आरोप, प्रमाणपत्रों के एवज में 25 और 30 लाख रुपये देने की बात सामने आई; मामले में अब तक आठ आरोपी गिरफ्तार।

देहरादून, 28 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एमबीबीएस में दाखिला दिलाने से जुड़े मामले में एसआईटी ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मुजफ्फरनगर निवासी प्रवीण कुमार, हरिद्वार निवासी जगपाल सिंह और बिजनौर निवासी रामपाल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों पर अपनी बेटियों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेज कथित तौर पर कूटरचित तरीके से तैयार कराने का आरोप है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या आठ हो गई है।
पुलिस के अनुसार, मामले की जांच एसएसपी के निर्देश पर गठित विशेष जांच टीम (एसआईटी) कर रही है। एसपी ग्रामीण-1 जया बलूनी के नेतृत्व में गठित टीम फर्जी प्रमाणपत्रों और उनके आधार पर मेडिकल दाखिले की प्रक्रिया की जांच कर रही है। इस प्रकरण में 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमेनटाउन थानों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोप था कि सरकारी पोर्टल पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र बनवाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऑनलाइन आवेदन किए गए। जांच के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेज कथित तौर पर फर्जी पाए गए।
बेटियों के दाखिले के लिए एजुकेशन कंसल्टेंट से संपर्क
एसआईटी की पूछताछ में प्रवीण कुमार और जगपाल सिंह ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने अपनी बेटियों खुशी और स्वाति के एमबीबीएस में दाखिले के लिए पहले गिरफ्तार किए जा चुके एजुकेशन कंसल्टेंट रूपेश पंडित से संपर्क किया था। पुलिस के अनुसार, रूपेश मेरठ में मिकोडो (MECODO) पाठशाला नाम से कंपनी संचालित करता था। वह निजी विश्वविद्यालयों और विदेशों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में कमीशन के आधार पर दाखिला दिलाने का काम करता था।
जांच के अनुसार, आरोप है कि बेटियों के दाखिले के लिए फर्जी आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाणपत्र और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र तैयार कराए गए। पुलिस का कहना है कि इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर खुशी का मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराया गया, जबकि स्वाति को नीट काउंसलिंग में शामिल कराया गया था। एसआईटी इस बात की जांच कर रही है कि कथित रूप से तैयार किए गए दस्तावेज किस प्रक्रिया से बनवाए गए और दाखिले की प्रक्रिया में उनका किस तरह इस्तेमाल हुआ।
प्रमाणपत्रों के लिए लाखों रुपये देने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान सामने आया कि प्रवीण कुमार ने प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में रूपेश पंडित को 25 लाख रुपये दिए थे, जबकि जगपाल सिंह ने 30 लाख रुपये देने की बात बताई। जांच एजेंसी कथित भुगतान, दस्तावेज तैयार कराने की भूमिका और दाखिले से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही है।
इस मामले में प्रवीण कुमार, जगपाल सिंह और रामपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद एसआईटी की जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने और उनके इस्तेमाल में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं तथा इस कथित नेटवर्क के जरिए कितने अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले में सामने आए आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के जरिए होनी है।

— Uttarakhand Morning Post



Source link

You may also like

Leave a Comment