ऑस्ट्रेलिया में एक भारतीय शख्स की मेहनत और सफलता की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। शख्स ने 11 सालों तक मेहनत करके धीरे-धीरे ऑस्ट्रेलिया में अपना खुद का कारोबार खड़ा कर लिया। करीब 11 साल पहले वह शख्स आगे की पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया गया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे अपने क्षेत्र में नौकरी पाने में काफी परेशानी हुई। इसके बाद उसने एक पिज्जा शॉप में फुल-टाइम काम शुरू कर दिया। यहां पर वह ग्राहकों के लिए पिज्जा तैयार करने और उनकी डिलीवरी करने का काम करता था। उनकी इस पूरी यात्रा के बारे में उनके साले और एंटरप्रेन्योर विनीत के ने X पर पोस्ट शेयर कर जानकारी दी। सोशल मीडिया पर ये कहानी तेजी से वायरल हो रही है।
पिज्जा शॉप की खोली तीन आउटलेट
अपनी जर्नी की शुरुआत में उनको कई मुश्किलों के बावजूद उसने हार नहीं मानी। करीब तीन साल तक पिज्जा शॉप में काम करने के बाद उसने पार्टनर के साथ मिलकर अपना पैसा लगाया और एक पिज्जा फ्रेंचाइजी खरीद ली। यहीं से उसकी नौकरी की जिंदगी धीरे-धीरे अपने कारोबार में बदलने लगी और उसने बिजनेस की दिशा में कदम बढ़ाया। समय के साथ उसका कारोबार लगातार बढ़ता गया और उसने दो और पिज्जा फ्रेंचाइजी खरीद लीं, जिससे उसके कुल तीन आउटलेट हो गए।
कोरोना में वह भारत आए
इसी दौरान उसकी निजी जिंदगी में भी कई बदलाव आए। कोरोना महामारी के समय वह भारत आया, जहां उसकी शादी हुई और बाद में वह अपनी पत्नी को ऑस्ट्रेलिया ले गया। कुछ समय बाद उनके दो बच्चे भी हुए। बताया जाता है कि आगे चलकर उसने ऑस्ट्रेलिया में अपना घर और एक BMW कार भी खरीदी। पोस्ट के अनुसार, शख्स ने हैदराबाद में अपना घर बनवाया और अपने माता-पिता को भी ऑस्ट्रेलिया बुला लिया। उनकी जिंदगी में एक और बड़ी उपलब्धि तब जुड़ी, जब उन्हें और उनके परिवार को ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता मिल गई। उनके साले विनीत ने बताया कि पिज्जा डिलीवरी से शुरू हुआ उनका सफर आज एक सफल कारोबारी जिंदगी तक पहुंच चुका है।
लोगों ने किया कमेंट
इस पोस्ट पर कई लोगों ने रिएक्शन दिया है। एक यूजर ने ऑस्ट्रेलिया में उसकी नौकरी को लेकर सवाल उठाते हुए लिखा, “स्टूडेंट वीजा पर पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑस्ट्रेलिया में पिज्जा शॉप में फुल टाइम नौकरी कैसे मिली, जबकि उसकी पढ़ाई का इस काम से कोई संबंध नहीं था? इसमें कुछ तो गलत लगता है।” वहीं, एक और यूजर ने कहा, “अगर वह अब ऑस्ट्रेलिया का नागरिक है और वहीं स्थायी रूप से रह रहा है, तो उसे भारत में घर की जरूरत क्यों है? और ‘एक्सटेंडेड ब्रदर-इन-लॉ’ का मतलब क्या होता है?”
एक और यूजर ने कहा, “ऐसी कहानियां भारत में काम कर रहे युवाओं के लिए उम्मीद बढ़ाती हैं। खासकर पंजाब जैसे राज्यों में, जहां बर्गर किंग का एक कर्मचारी दिन में 9 घंटे काम करता है। उसे पता है कि कनाडा में इतने ही 9 घंटे काम करने पर उसे कम से कम 5 गुना ज्यादा कमाई हो सकती है।”
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।
