Why Cardiac Arrest Cases Increased In Morning Time: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर की मौत दिल का दौरा पड़ने के कारण गुरुवार भोर में हो गई. रिपोर्ट के मुताबिक रात में करीब 2:30 बजे से वह असहज महसूस कर रहे थे. उन्होंने खुद इसको लेकर अपने दोस्त को मैसेज किया था. लेकिन, दोस्त ने मैसेज नहीं देखा. वह तड़के करीब 4:30 बजे उठा तो नाना का मैसेज देखा. फिर वह उनके पास पहुंचा और उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी शुरू हुई. लेकिन, तब तक काफी देर हो चुकी थी. सुबह 5:20 बजे उन्होंने अंतिम सांस ले ली. अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी धड़कन वापस लाने के लिए करीब 45 मिनट तक सीपीआर किया, लेकिन उसका भी कोई असर नहीं हुआ. ऐसे में एक बार फिर सवाल उठता है कि आखिर भोर या तड़के सुबह में ऐसी घटना ज्यादा क्यों देखी जाती है. मेडिकल साइंस भी यह मानता है कि दिन की शुरुआत के आसपास हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है. खासकर सुबह के घंटों में शरीर के अंदर कई ऐसे बदलाव होते हैं जो दिल और रक्त सर्कुलेशन पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं. यही वजह है कि सुबह का समय दिल के लिए अपेक्षाकृत संवेदनशील माना जाता है.
गणपति उत्सव के दौरान भगवान गणेश की पूजा करते नाना पाटेकर. फाइल फोटो- पीटीआई
सुबह होते ही शरीर में होता है बदलाव
हेल्थ वेबसाइट ईएमसी हेल्थकेयर की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हमारी बॉडी क्लॉक यानी सर्केडियन रिदम है. यह शरीर की नेचुरल स्थिति है. दरअसल, जब हम नींद से जागते हैं तो हार्मोन, ब्लड प्रेशर, हृदय गति और कई दूसरी शारीरिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करती है. रात में जब हम सो रहे होते हैं तो शरीर अपेक्षाकृत शांत अवस्था में रहता है. लेकिन सुबह जागने के आसपास शरीर धीरे-धीरे सक्रिय होने लगता है. इसी दौरान कॉर्टिसोल और दूसरे तनाव संबंधी हार्मोन का स्तर बढ़ता है. ये हार्मोन शरीर को नींद से बाहर निकालकर दिन की गतिविधियों के लिए तैयार करते हैं. इसके साथ ही सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम ज्यादा सक्रिय होता है. इससे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है. यानी शरीर के लिए यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जिन लोगों की धमनियों में पहले से समस्या है, उनके लिए यह समय ज्यादा संवेदनशील हो सकता है.
सुबह ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ता है?
सोने के दौरान ब्लड प्रेशर आमतौर पर कम रहता है. लेकिन जागने के बाद शरीर सक्रिय होता है और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है. इसे मॉर्निंग ब्लड प्रेशर सर्ज कहा जाता है. किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में यह बदलाव सामान्य हो सकता है. लेकिन हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, ज्यादा कोलेस्ट्रॉल या पहले से हृदय रोग वाले व्यक्ति में अचानक बढ़ा हुआ दबाव ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.
क्या सुबह खून में थक्का जल्दी बनता है?
सुबह के समय शरीर में खून के थक्के बनने और उन्हें पिघलाने की प्रक्रियाओं के बीच संतुलन भी बदलता है. प्लेटलेट्स यानी खून को जमाने वाली कोशिकाएं ज्यादा सक्रिय हो सकती हैं, जबकि शरीर की फाइब्रिनोलिटिक गतिविधि यानी बने हुए थक्के को तोड़ने की क्षमता अपेक्षाकृत कम हो सकती है. इसलिए सुबह के समय शरीर में एक साथ कई बदलाव होते हैं- ब्लड प्रेशर बढ़ना, दिल की धड़कन तेज होना, तनाव हार्मोन बढ़ना और खून के जमने की प्रवृत्ति में बदलाव. इनका असर पहले से कमजोर हृदय वाले व्यक्ति में ज्यादा हो सकता है.
रातभर सोने के बाद पानी की कमी भी एक वजह?
रात में कई घंटे तक पानी नहीं पीने से शरीर में हल्की डिहाइड्रेशन हो सकती है. इससे खून की सांद्रता यानी कंसंट्रेशन में कुछ बदलाव आ सकते हैं. हालांकि इसे अकेले हार्ट अटैक की वजह नहीं माना जा सकता. हार्ट अटैक आमतौर पर एक ही कारण से नहीं होता. धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मधुमेह, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, तनाव और परिवार में हृदय रोग का इतिहास जैसे कई कारक जोखिम बढ़ाते हैं. सुबह के समय शरीर के प्राकृतिक बदलाव इन जोखिमों के ऊपर एक अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं.
किन लोगों को सुबह में ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
खास तौर पर उन लोगों को अपने हृदय के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना चाहिए जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय की बीमारी है. धूम्रपान करने वालों और पहले हार्ट अटैक झेल चुके लोगों में भी जोखिम ज्यादा हो सकता है. ऐसे लोगों के लिए सुबह अचानक बहुत भारी शारीरिक मेहनत शुरू करना उचित नहीं माना जाता. खासकर ठंड के मौसम में तापमान कम होने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ सकती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है. इसलिए व्यायाम करने से पहले शरीर को धीरे-धीरे सक्रिय करना बेहतर है.
तो क्या भोर का समय दिल के लिए सबसे खतरनाक है?
इतना जरूर कहा जा सकता है कि सुबह के आसपास हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम बढ़ने का वैज्ञानिक आधार है. इसकी वजह शरीर की सर्केडियन क्लॉक से जुड़े कई बदलाव हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हार्ट अटैक सिर्फ सुबह ही आता है या हर व्यक्ति के लिए सुबह सबसे खतरनाक समय है. नाना पाटेकर के मामले में भी उनकी मौत सुबह हुई है, लेकिन उनकी व्यक्तिगत चिकित्सा स्थिति और मौत की वजह पर अंतिम निष्कर्ष डॉक्टरों और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जा सकता है.
