डिजिटल डेस्क, पुणे। पुणे में रविवार रात एक बेघर मरीज स्ट्रेचर के साथ चलती एंबुलेंस से गिर गया। एंबुलेंस के पीछे के दरवाजा खुले होने के कारण हादसा हुआ।
घटना के बाद एंबुलेंस रुकी नहीं और करीब 90 सेकेंड बाद घटनास्थल पर लौटी, तब तक स्थानीय लोगों ने बिना समय बर्बाद किए घायल मरीज को सुरक्षित किनारे पहुंचा दिया था।
एक बेघर व्यक्ति को संक्रमण के इलाज के लिए पिंपरी में पीसीएमसी द्वारा संचालित यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल (YCM) में भर्ती किया गया था, लेकिन अस्पताल में उपयुक्त सुविधाएं नहीं होने के कारण उसे ससून जनरल अस्पताल रेफर कर दिया गया था।
नियमों के मुताबिक बेघर मरीज के साथ देखभाल करने वाले रिश्तेदार न होने के कारण एंबुलेंस में एक पुलिस अधिकारी तैनात था। जैसे ही एंबुलेंस YCM अस्पताल के मुख्य गेट से बाहर निकली, अचानक उसका पिछला दरवाजा खुल गया और बेघर मरीज स्ट्रेचर समेत सीधे सड़क पर गिर गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुई घटना
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी व्यापक रूप से निंदा की गई और अस्पताल प्रशासन और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इस घटना के बाद हुई निंदा के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की कार्रवाई शुरू की। अस्पताल के डीन डॉ. राजेंद्र वाबले ने कहा, ‘हमने ड्राइवर और स्टाफ सदस्य को नोटिस जारी कर दिए हैं।’
सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर समस्या उजागर
इस घटना की शुरुआती जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों से खुलासा हुआ है कि एंबुलेंस के अंदर स्ट्रेचर के पहियों को ठीक से लॉक नहीं किया गया था।
साथ ही एक कर्मचारी जिसे रोगी के साथ बैठना था वह यात्री सीट पर बैठा था। इससे भी बुरी बात की ड्राइवर को जरा भी अंदाजा नहीं था कि मरीज एंबुलेंस के दरवाजों से टकराकर बाहर गिर गया है।
राहगीरों ने दिखाई इंसानियत
वायरल वीडियो में राहगीरों को मरीज और स्ट्रेचर को ले जाते हुए देखा गया। लगभग 90 सेकेंड बाद जब एंबुलेंस वापस आई, तो चालक और वार्ड बॉय एक दूसरे पर गलती थोपते नजर आए। वहीं यात्री सीट पर बैठे पुलिसकर्मी को यह कहते सुना गया कि पिछला दरवाजा ठीक से बंद नहीं था।
लोगों का फूटा गुस्सा
इस घटना के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूटा। एक यूजर ने इस घटना की अलोचना करते हुए कहा कि मरीज भाग्यशाली था कि एंबुलेंस के पीछे कोई वाहन नहीं था।
एक अन्य यूजर पूर्णिमा कुम्भार्कर ने साजिश का आरोप लगाया; और रमेश राउत ने गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की। एक अन्य यूजर नदाफ हुसैन ने कहा कि मरीज का बेघर होना किसी भी तरह से उसके जीने के अधिकार को कम नहीं करता है।
