गयाजी24 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) में सोमवार को पांचवें दीक्षांत समारोह में 1662 छात्रों को डिग्री मिली और 61 मेधावी छात्रों को 95 गोल्ड मेडल दिए गए। कार्यक्रम खत्म होने के बाद खाने की गुणवत्ता को लेकर विवाद हो गया।
छात्रों ने ठंडी पूड़ी, बिना मसाले वाले आलू और खाने से बदबू आने की शिकायत की। उन्होंने जमकर नाराजगी जताई, जिसका वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
खाने की गुणवत्ता पर सवाल
छात्रों ने बताया कि उन्हें परोसा गया खाना बहुत खराब था। थाली में ठंडी पूड़ी, बेस्वाद आलू के टुकड़े और एक मिठाई थी। कुछ छात्रों ने खाने से बदबू आने की भी शिकायत की।
वायरल वीडियो में छात्र खाने की गुणवत्ता पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। उन्होंने आशंका जताई कि इससे लोग बीमार पड़ सकते हैं। हालांकि, फूड पॉइजनिंग की पुष्टि नहीं हुई है। विश्वविद्यालय के PRO ने कहा कि आगे से ध्यान रखा जाएगा।

खाने की गुणवत्ता पर उठाए सवाल।

खाने से बदबू आने की शिकायत।
खाना बनाने वाले कर्मी ने कहा- जैसा निर्देश मिला, वैसा बनाया
भोजन को लेकर छात्रों का हंगामा बढ़ने पर खाना बनाने वाले कर्मी और केयरटेकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उन्हें खाना बनाने के लिए जैसा निर्देश दिया गया था, उन्होंने उसी के अनुसार भोजन तैयार किया है। इस पर विद्यार्थियों ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें इसी तरह का खराब खाना बनाने के लिए कहा गया था?
छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। वहीं, संबंधित कर्मी ने भोजन को खराब मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि विभाग के अन्य लोगों को भी यही खाना दिया गया था, लेकिन उनकी ओर से कोई शिकायत नहीं की गई।
हालांकि, दूसरे लोगों की ओर से शिकायत नहीं किए जाने का तर्क विद्यार्थियों की नाराजगी को शांत नहीं कर सका। इस पूरे घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठने लगा कि इतने बड़े आयोजन में भोजन की गुणवत्ता की जांच और निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी।

छात्रों ने जताई नाराजगी।
पीआरओ बोले- समीक्षा करेंगे, अगली बार रखेंगे ध्यान
इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) मोहम्मद मुदस्सिर आलम ने कहा, ‘इवेंट दीक्षांत समारोह था, उस पर फोकस होना चाहिए। अब किसी को खाना खराब लगा, तो हम समीक्षा करेंगे और अगली बार से इन बातों का ध्यान रखेंगे।’
विश्वविद्यालय प्रशासन के इस बयान से स्पष्ट है कि भोजन को लेकर मिली शिकायतों की समीक्षा किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, विद्यार्थियों की नाराजगी के बीच अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और भविष्य में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।

