Home Box Officeन बड़ा स्टार, न करोड़ों का बजट…’हनुमान अंश’ जैसा चमत्कार करेगी ‘बाला गोरिया’, कौन हैं गोलू देवता? चिट्ठियों-घंटियों से सजा जिनका दरबार – Bala Goriya Movie golu devta story will create magic lord of justice hanuman ansh box office tmovh

न बड़ा स्टार, न करोड़ों का बजट…’हनुमान अंश’ जैसा चमत्कार करेगी ‘बाला गोरिया’, कौन हैं गोलू देवता? चिट्ठियों-घंटियों से सजा जिनका दरबार – Bala Goriya Movie golu devta story will create magic lord of justice hanuman ansh box office tmovh

by BollywoodNewsAndMovie


हनुमान अंश की सफलता के बाद से इंडस्ट्री का कंटेंट भक्तिमय हो चला है. आध्यात्म और भक्ति से जुड़ी कहानियां बॉक्स ऑफिस पर गदर मचा रही हैं. महज 2 करोड़ में बनी हनुमान अंश रिलीज के 66वें दिन भी बंपर कमाई कर रही है. मूवी का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 435 करोड़ के पार हो गया है. जो फिल्म एक वक्त पिटने वाली थी, उसकी इस अद्भुत कमाई का श्रेय लोग नीम करोली बाबा के चमत्कार को दे रहे हैं. इस फिल्म के बाद महाराज जी के प्रति लोगों की आस्था भी बढ़ी है.  

धार्मिक आस्था और भारतीय लोककथाओं पर आधारित फिल्में में दर्शकों की रुचि बढ़ी है. कैंची धाम के बाद अब उत्तराखंड की पावन देवभूमि के लोकदेवता गोलू देवता की कहानी बड़े पर्दे पर दस्तक देने वाली है. फिल्म का नाम है- बाला गोरिया. न बड़े सुपरस्टार का तामझाम और न ही करोड़ों के बजट का शोर… बस एक छोटे बजट की फिल्म, जिसे सच्चाई और श्रद्धा से बनाया गया है. मूवी में उत्तराखंड के आराध्य गोलू देवता की कहानी, उनकी न्यायप्रियता और लोगों की उनके प्रति अटूट आस्था की झलक दिखेगी.

हनुमान अंश का कमाल दोहराएगी बाला गोरिया?
गोलू देवता का मंदिर उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र के अल्मोड़ा में स्थित है. वहां के लोगों के बीच गोलू देवता को न्याय के देवता के रूप में पूजा जाता है. पहले ये फिल्म 16 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी. लेकिन हनुमान अंश की जादुई कमाई और लोगों की आस्था को देखने के बाद बाला गोरिया के मेकर्स का फैसला बदला है. अब ये फिल्म नवंबर के मध्य में रिलीज हो सकती है. मेकर्स चाहते हैं ये फिल्म ज्यादा से ज्यादा लोग देख पाएं. इसलिए इसे बड़े स्केल पर रिलीज करने का प्लान बनाया जा रहा है. 

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गोलू देवता की ये गाथा भी हनुमान अंश की तरह दर्शकों के दिलों में जगह बना पाएगी? क्या ये मूवी भी बॉक्स ऑफिस वंडर साबित होगी? नीम करोली बाबा के दुनियाभर में प्रशंसक रहे हैं. इनमें स्टीव जॉब्स, विराट कोहली जैसे बड़े नाम शामिल हैं. कैंची धाम से जुड़ा स्टार कनेक्शन भी इस फिल्म के हिट होने की बड़ी वजह है. लेकिन गोलू देवता के बारे में कम ही लोग जानते हैं. इसलिए बाला गोरिया के लिए हनुमान अंश की सफलता दोहराना चैलेंजिंग होगा. फिल्म की सक्सेस में इसकी रिलीज, प्रमोशन, कहानी और वर्ड माउथ अहम रोल प्ले करेंगे. 

वो मंदिर जहां चिट्ठियों से मिलता है न्याय
उत्तराखंड में खासतौर पर कुमाऊं में गोलू देवता के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा है. उन्हें गोल्ज्यू महाराज, घोड़ियाल देवता (घोड़े वाले देवता) और न्याय के देवता के नाम से भी जाना जाता है. गोलू देवता का वाहन सफेद घोड़ा है. अल्मोड़ा के चितई, चंपावत और घोड़ाखाल में उनके मंदिर हैं. गोलू देवता के दरबार में हजारों श्रद्धालु न्याय की गुहार लिए आते हैं. वो भगवान गोलू महाराज के दर पर चिट्ठियां लिखकर न्याय मांगते हैं. अपनी समस्याओं और मन्नतों को कागज पर लिखकर मंदिर में अर्पित करते हैं. मनोकामना पूरी होने पर कई श्रद्धालु घंटियां चढ़ाकर गोलू देवता के प्रति अपना आभार जताते हैं.

गोलू देवता के मंदिरों में घंटियों और भक्तों की अर्जियों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. गोलू देवता अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले और कमजोर लोगों की मदद करने वाले देवता हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें भगवान शिव के गौर भैरव स्वरूप का अवतार भी माना जाता है.

कौन हैं गोलू देवता?
लोककथाओं के मुताबिक, गोलू देवता का जन्म राज परिवार में हुआ था. वो कत्यूरी वंश के राजा झालू राय और रानी कालिंका के बेटे थे. कहते हैं राजा झालू राय की 7 पत्नियां थीं. लेकिन उन्हें संतान का सुख नहीं था. वो काफी परेशान रहते थे. वो वंश आगे बढ़ाने को लेकर चिंतित थे. इस दौरान उनकी कुंडली देखकर बताया गया कि उनकी 8वीं शादी होगी, जिससे उन्हें संतान मिलेगी. आगे जाकर कलिंगा और झालू राय की शादी हुई. लेकिन महल की सातों रानियां कलिंगा से जलती थीं. कलिंगा के गर्भवती होने पर सभी रानियां डर गईं. उन्होंने कलिंगा की होने वाली संतान के खिलाफ षडयंत्र रचा. 

उन्होंने नवजात बच्चे को महल की गौशाला में फेंक दिया. रानी कलिंगा की गोद में पत्थर रख दिया. जब कलिंगा होश में आई और अपनी गोद में पत्थर को देख तो रोने लगीं. लोककथाओं के अनुसार, गौशाला में एक गाय ने बच्चे ने नन्हे लाडले का ख्याल रखा. बाद में जब सातों रानियों को पता चला कि बच्चा जीवित है. उन्होंने उसे मारने की दूसरी तरकीब सोची. नवजात बच्चे को लोहे के संदूक में डालकर नदी में बहा दिया. रानियों को लगा बच्चा मर गया. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एक मछुआरे ने बच्चे को गौरीघाट पर देखा और उसे बचाकर उसका पालन-पोषण किया. क्योंकि बच्चा गौरी घाट पर मिला था इसलिए उसका नाम गोरिया रखा गया.

लोग उसे प्यार से गोलू बुलाने लगे.  बचपन से गोलू तेजस्वी, निडर और न्याय प्रिय था. गोलू को सपने में अपने जन्म से जुड़े स्वपन और अन्याय की झलक दिखती थी. फिर वो अपने असली पहचान को तलाशने की ओर निकल पड़ा. गोलू ने राजा के सामने सातों रानियों का पर्दाफाश किया. राजा ने गोलू के कहने पर सातों रानियों को माफ किया. गोलू देवता बदले की भावना के खिलाफ थे. बड़े होकर गोलू ने राज्य की जिम्मेदारी उठाई. सब उनके सामने अपने दुखों की फरियाद करते. गोलू देवता के देह त्यागने के बाद भी लोगों की आस्था उनके साथ जुड़ी रही. 

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