हिंदी सिनेमा का इतिहास सिर्फ फिल्मों की कहानियों का इतिहास नहीं है, बल्कि बदलती पसंद और बदलते सिनेमाई ट्रेंड का भी इतिहास है। एक दौर था जब बड़े पर्दे पर प्रेम कहानियों का जादू चलता था। हीरो-हीरोइन, प्यार, जुदाई और मिलन… यही फॉर्मूला दर्शकों को थिएटर तक खींच लाता था। फिर समय बदला और बॉलीवुड ने कॉमेडी को अपनाया। एक के बाद एक कॉमेडी फिल्मों ने दर्शकों को हंसाया और बॉक्स ऑफिस पर अपनी जगह बनाई।
इसके बाद हॉरर और हॉरर-कॉमेडी का दौर आया, जब भूत-प्रेत और डर के साथ हंसी का तड़का भी दर्शकों को पसंद आने लगा। फिर आया एक्शन का दौर। बड़े सितारे, बड़े हथियार, बड़े सेट, हाई-ऑक्टेन एक्शन और करोड़ों का बजट… बॉलीवुड की कई बड़ी फिल्में इसी फॉर्मूले पर बनने लगीं। इन सबके बीच मेकर्स कुछ बायोपिक फिल्में भी लेकर आए, जिनमें से कुछ हिट हुईं तो कुछ फ्लॉप। लेकिन अब ऐसा लगता है कि हिंदी सिनेमा का बायोपिक वाला दौर फिर दस्तक दे रहा है।
दरअसल, साल 2026 में जिस तरह नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी ‘हनुमान अंश’ हिट हुई और चंदू चैंपियन को नेशनल अवॉर्ड मिला। ऐसे में मेकर्स का झुकाव बायोपिक की तरफ बढ़ता नजर आ रहा है। सिर्फ इतना ही नहीं, 2027 में भी कई बड़े बायोपिक प्रोजेक्ट लाइन में हैं, उससे यह सवाल जरूर उठता है कि क्या बॉलीवुड अब काल्पनिक कहानियों से ज्यादा वास्तविक जिंदगी के किरदारों में नया ड्रामा तलाश रहा है।
