दीपेश पांडेय, मुंबई। बकरापुर, चौरंगा और नो फादर इन कश्मीर फिल्मों के अभिनेता अंशुमन झा, अभिनय के साथ-साथ फिल्मों के निर्माण और निर्देशन में भी सक्रिय हैं। उन्हें वहीं फिल्मे बनाना और करना पसंद है, जिन्हें वह स्वयं बतौर दर्शक देखना चाहते हैं। उन्होंने साल 2023 में प्रदर्शित फिल्म लकड़बग्घा की सीक्वल लकड़बग्घा 2 : द मंकी बिजनेस बनाई है। अभिनय के साथ-साथ अंशुमन ने इसका निर्देशन भी किया है। इससे पहले फिल्म लकड़बग्घा टिकट खिड़की पर उतनी सफल नहीं हो पाई थी, फिर भी अंशुमन ने लकड़बग्घा 2 बनाई है।
क्यों बनाया लकड़बग्घा का सीक्वल
इस पर अंशुमन का कहना है, ‘लकड़बग्घा फिल्म को कभी एक अकेली फिल्म के तौर पर सोचा ही नहीं गया था। हमने हमेशा इसे तीन फ्रेंचाइजी के तौर सोचा था। हम एनिमल लवर्स के लिए एक कहानी का यूनिवर्स बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ये एक साधारण व्यक्ति की कहानी है, जो मार्शल आर्ट्स में निपुण है। ये कहानी बताती है कि अगर आप बेजुबानों के लिए लड़ते हैं, तो भगवान आपका साथ देता है।

हम देख रहे हैं कि इन दिनों सिनेमाघरों में कमाई के आंकड़ों को लेकर लोग खूब दिखावा कर रहे हैं। जबकि दिखावा आंकड़ों का नहीं, फिल्मों का करना चाहिए। जब मैं बड़ा हो रहा था, तो मुझे नहीं पता था कि किस फिल्म ने कितनी कमाई की है। मुझे बस ये पता होता था कि कौन सी फिल्म अच्छी है और कौन सी नहीं। लकड़बग्घा के मामले में भी ऐसा ही था, जिसने भी वो फिल्म देखी, उसको फिल्म पसंद आई, फिर वो पशु प्रेमी हो या न हो।
हनुमान जी को समर्पित है फिल्म
जब फिल्म जी 5 (Zee5) पर रिलीज हुई तो उसको 135 मिलियन व्यूज मिले। इससे हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है। हमारी इंडस्ट्री में जो पहले वीकेंड में कमाई का फार्मूला बनाया गया है, उस हिसाब से तो हनुमान अंश (Hanuman Ansh) के निर्माताओं को भी दुखी होना जाना चाहिए थे, लेकिन वो प्रमोशन में लगे रहे। फिर देखिए क्या हुआ, उस फिल्म ने इतिहास रचा। हमारी फिल्म लकड़बग्घा 2 (Lakadbaggha 2: The Monkey Business) में भी याकी बंदर के बारे में बात की गई है। जो अब विलुप्त होने की कगार हैं। हमारी फिल्म भी एक तरह से हनुमान जी को समर्पित है।’
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अंशुमन की इस फिल्म को बेल्जियम में एक्शन फिल्मों के लिए आयोजित होने वाली रेजर रील फ्लेंडर फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के लिए चुना गया है। वह कहते हैं, ‘हमारे यहां इस तरह की फिल्में बहुत कम बनती हैं, अगर बनती भी हैं तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उतनी नहीं पहुंच पाती हैं। हमने एशियन मार्शल आर्ट्स पर फिल्म बनाई है, जिसका पहले कान फिल्म फेस्टिवल समेत कई दूसरे प्रतिष्ठित मंचों पर प्रदर्शन किया जा चुका है। अब फिल्म रेजर रील फ्लेंडर फिल्म फेस्टिवल में चुनी गई है, जो सिर्फ फिल्म के लिए ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का पल है।’
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कमर्शियल फिल्मों से क्यों दूर हैं अंशुमन
नो फादर इन कश्मीर एवं हरि का ओम जैसी फिल्में करने वाले अंशुमान कमर्शियल मसाला फिल्मों से दूरी को लेकर कहते हैं, ‘मैं वो काम करना चाहता हूं, जो 30 साल बाद अगर मैं पीछे मुड़कर देखूं तो खुद पर गर्व हो कि मैंने कुछ अलग किया है। बाकी मुझे आगे कमर्शियल मसाला फिल्में भी मिलती हैं, तो मैं अवश्य करूंगा। इसीलिए जो फिल्में मैं करता हूं, उनमें मेरी कोशिश होती है पिछले 20-22 वर्षों में थिएटर और गुरुओं से जो सीखा वो अपनी फिल्मों में डाल सकूं। मैं अपनी ही धुन में हूं, अपनी ही राह पर चल रहा हूं। मुझसे इससे नहीं फर्क पड़ता है कि बाकी दूसरे लोग क्या कर रहे हैं। मुझे गाली-गलौज पसंद नहीं है, इसलिए ऐसी चीजों से दूर रहने की ही कोशिश करता हूं।’
