Home Box Officeबॉक्स ऑफिस पर छाई Drishyam The Conclusion, फिल्म की सफलता पर डायरेक्टर Abhishek Pathak का आया पहला रिएक्शन

बॉक्स ऑफिस पर छाई Drishyam The Conclusion, फिल्म की सफलता पर डायरेक्टर Abhishek Pathak का आया पहला रिएक्शन

by BollywoodNewsAndMovie


एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। अजय देवगन (Ajay Devgn) की सस्पेंस थ्रिलर दृश्यम का आखिरी पार्ट ‘दृश्यम द कॉन्क्लूजन’ (Drishyam The Conclusion) सिनेमाघरों में रिलीज हो गया है। फिल्म को न केवल क्रिटिक्स बल्कि दर्शकों से भी खूब तारीफ मिल रही है।

पहले दिन 60 करोड़ रुपये के ऊपर से बॉक्स ऑफिस ओपनिंग करने वाली ‘दृश्यम द कॉन्क्लूजन‘ की टाइट और ग्रिपिंग स्क्रीनप्ले की सराहना कर रहे हैं। साथ ही फिल्म के क्लाइमैक्स की भी खूब तारीफ हो रही है। अब फिल्म के डायरेक्टर और राइटर अभिषेक पाठक (Abhishek Pathak) ने फिल्म को लेकर मिल रहे पॉजिटिव रिव्यू पर रिएक्शन दिया है।

फिल्म का क्लाइमैक्स था सबसे बड़ी चुनौती

अभिषेक पाठक ने फिल्म के क्लाइमैक्स को लेकर कहा, “‘दृश्यम द कॉन्क्लूजन’ बनाना मेरे लिए एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी, क्योंकि दर्शक इतने सालों से इस दुनिया के साथ जुड़े हुए हैं। हर किसी के पास अपनी थ्योरी, अपनी उम्मीदें और अपने विचार थे कि इस कहानी का अंत कैसे होना चाहिए। मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी उस सफर का सम्मान करना, लेकिन साथ ही दर्शकों को ऐसा अनुभव देना, जिसकी उन्होंने शायद उम्मीद न की हो।”

ऑडियंस की दिलचस्पी से खुश हुए डायरेक्टर

फिल्म की रिलीज के बाद ही मिल रही ऑडियंस की प्रतिक्रिया से अभिषेक पाठक काफी खुश हैं। उन्होंने कहा, “अब जब मैं दर्शकों को फिल्म का अनुभव करते हुए, उसके अंत पर चर्चा करते हुए और यह बहस करते हुए देखता हूं कि विजय ने आखिर क्या किया, तो यह मेरे लिए वाकई बेहद संतोषजनक है।

abhishek pathak

मेरे लिए दृश्यम हमेशा से इस बात को लेकर रहा है कि लोग सच को किस तरह देखते और समझते हैं। फिल्म देखने के बाद भी दर्शक जिस तरह इसे लेकर चर्चा कर रहे हैं और अपने-अपने तरीके से इसे एक्सप्लेन कर रहे हैं, यही इस फ्रेंचाइजी को इतना खास बनाता है।”

दृश्यम 3 को लेकर क्यों हैरान हुए डायरेक्टर?

अभिषेक ने आगे कहा, “जिस बात ने मुझे सबसे ज्यादा हैरान किया है, वह यह है कि लोग सिर्फ विजय से ही नहीं, बल्कि दृश्यम की पूरी दुनिया से कितनी भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। आपको एहसास होता है कि इतने सालों के बाद ये किरदार लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं और एक फिल्ममेकर के तौर पर इससे ज्यादा संतोषजनक और कुछ नहीं हो सकता कि दर्शक थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी फिल्म के अंत को अपने साथ लेकर जाएं।”



Source link

You may also like

Leave a Comment