हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक फिल्म ने आस्था के साथ बॉक्स ऑफिस पर भी चमत्कार किया हो। साल 1975 में आई ‘जय संतोषी मां’ इसका सबसे चर्चित उदाहरण है। महज 25 लाख रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब सवा पांच करोड़ रुपये का कारोबार किया था। उस दौर में भी दर्शक सिनेमाघरों में जूते-चप्पल उतारकर फिल्म देखा करते थे।
बॉक्स ऑफिस पर पहले भी रहा बोलबाला
दरअसल, धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक फिल्मों का बॉलिवुड से पुराना नाता रहा है। भारतीय सिनेमा की शुरुआत से ही धर्म, पौराणिक कथाएं और आध्यात्मिक किरदार पर्दे का हिस्सा रहे हैं। 1913 में दादा साहेब फाल्के की ‘राजा हरिश्चंद्र’, जिसे भारत की पहली फीचर फिल्म माना जाता है, से लेकर आज आधुनिक तकनीक से सजी ब्रह्मास्त्र पार्ट वन रही हो या फिर आने वाली रामायण, जय हनुमान और महा अवतार परशुराम तक, दर्शकों और इन कहानियों के बीच जुड़ाव लगातार मजबूत रहा है और यही वजह है कि मेकर्स भी इस विषय पर दांव लगाने को तैयार रहते हैं। दौर बदला, तकनीक बदली, कहानी कहने का अंदाज बदला, लेकिन आस्था से दर्शकों का रिश्ता नहीं बदला। यही वजह है कि धार्मिक और पौराणिक सिनेमा ने समय-समय पर न सिर्फ दर्शकों के दिल जीते, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी अपनी ताकत साबित की।
इन फिल्मों ने की थी छप्परफाड़ कमाई
हर हर महादेव
संपूर्ण रामायण
बजरंग बली
सती अनसूया
मायाबाजार
जय संतोषी मां
शिरडी के साईं बाबा
भक्त प्रह्लाद
हनुमान
कांतारा
ब्रह्मास्त्र पार्ट वन
मजबूत संदेश ज़रूरी
साल 1950 में आई हर हर महादेव उस साल की टॉप 5 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल हुई। 1956 में प्रदर्शित हुई सती अनसूया भी टिकट खिड़की पर खूब चली थी। ये सिनेमा का वो दौर था, जब बॉलिवुड पर माइथोलॉजी और धार्मिक फिल्मों का बोलबाला हुआ करता था। उसके बाद 1961 में आई संपूर्ण रामायण 60 के दशक सबसे सफल और ब्लॉकबस्टर पौराणिक फिल्म मानी गई। इसी दौर में भगवान हनुमान पर कई फिल्में बनीं और हनुमान के रूप में दारा सिंह बहुत लोकप्रिय रहे।
‘ओ माय गॉड 2’ के निर्देशक ने क्या कहा
‘ओ माय गॉड 2’ जैसी हिट फिल्म बनाने वाले निर्देशक अमित राय इस तरह की फिल्मों की बॉक्स ऑफिस सक्सेस को लेकर कहते हैं, ‘तीन हफ्ते तक हनुमान अंश को कोई नहीं जानता था, लेकिन सिनेपोलिस ने भरोसा दिखाया और फिल्म को टिकाए रखा। फिर वर्ड ऑफ माउथ ने कमाल कर दिया। ऐसी फिल्मों में ईमानदारी और मजबूत संदेश हो, तो वे अपना जादू चला देती हैं। मैंने ऐसा असर भक्त प्रह्लाद, संतोषी माता और शिरडी के साईं बाबा में देखा है। ये चमत्कार दिखाने वाली नहीं, सीख देने वाली फिल्में थीं और इनके संगीत ने भी लोगों को जोड़ा। आप देखिए, इन तीनों फिल्मों का म्यूजिक अपने जमाने में सुपरहिट था।’
आने वाले दिनों में ये फिल्में होंगी रिलीज़
रामायण
महावतार सीरीज
महाकाली
हनुमान अंश 2
तेरा साई
बाबा खाटू श्याम
राधा कृष्ण पर करण की फिल्म
हमारा धर्मभीरू होना भी काम करता है
जाने-माने ट्रेड विश्लेषज्ञ कोमल नाहटा का मानना है कि हनुमान अंश जैसा क्रेज बॉक्स ऑफिस पर कई बार देखने को मिला है। पिछले साल आई महावतार नरसिम्हा ने भी बॉक्स ऑफिस पर 220 करोड़ से भी जयादा का बिजनेस किया था। वे कहते हैं, ‘अगर फिल्मी लैंग्वेज में कहूं, तो ये फिल्में एक बार बॉक्स ऑफिस पर चिपक जाती हैं, तो फिर चिपक कर रह जाती हैं। हमारे देश में आस्था को हमेशा खास जगह मिली है। असल में हम गॉड फियरिंग (धर्मभीरू) लोग हैं और ऐसी फिल्मों में आस्था वाला इमोशन काम कर जाता है। फिर इस तरह की फिल्में माउथ पब्लिसिटी से भी चल निकलती हैं। असल में इस तरह की फिल्मों की कहानी और किरदारों को स्थापित करने में वक्त नहीं लगता। अब आप देखिए कि नमित मल्होत्रा जैसे बड़े मेकर भी हमारी माइथॉलजी को विश्व स्तर पर ले जाने को कटिबद्ध हैं। यही वजह है कि उन्होंने करोड़ों की लागत की रामायण बनाई है। आने वाले दिनों में आपको इस जॉनर की कई फिल्में देखने को मिलेंगी।’

