सिनेमाई पर्दे पर करवाचौथ की झलक
शाहरुख खान और काजोल की कल्ट फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे’ का करवाचौथ सीन भला कौन भूल सकता है। इस फिल्म में सिमरन का राज के लिए पूरे दिन भूखे-प्यासे रहकर व्रत रखना और फिर राज के हाथों पानी पीकर व्रत खोलना, दर्शकों के लिए एक आइकॉनिक पल बन गया था। यह दृश्य फिल्म के सबसे भावुक और यादगार हिस्सों में गिना जाता है।
करण जौहर की फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ में भी करवाचौथ को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। इस फिल्म के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए भी यह त्योहार अपनी जड़ों से जुड़ने का एक बड़ा माध्यम है। वहीं, अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी की फिल्म ‘बागबान’ में करवाचौथ के जरिए पति-पत्नी के अटूट बंधन को दिखाया गया है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे दूरियां होने के बावजूद, बच्चे उन्हें अलग कर दें तब भी वे एक-दूसरे के लिए व्रत रखते हैं और फोन के जरिए अपना उपवास खोलते हैं।
इमोशन और ड्रामा का संगम
करवाचौथ के दृश्यों का इस्तेमाल फिल्मों में केवल रोमांस के लिए ही नहीं, बल्कि कहानी में ट्विस्ट लाने के लिए भी किया गया है। सलमान खान और करिश्मा कपूर की फिल्म ‘बीवी नं. वन’ का करवाचौथ सीक्वेंस काफी चर्चित रहा है। इसमें एक तरफ पत्नी का निस्वार्थ प्रेम है, तो दूसरी तरफ पति की बेवफाई का कड़वा सच भी सामने आता है, जो इस त्योहार के इर्द-गिर्द बुने गए ड्रामे को एक अलग आयाम देता है।
इसके अलावा, शाहिद कपूर और अमृता राव की फिल्म ‘इश्क-विश्क’ में भी करवाचौथ का सेलिब्रेशन देखने को मिला था। फिल्म में अमृता राव छुपते-छुपाते शाहिद के लिए व्रत रखती हैं और शाहिद भी उनसे वादा करते हैं कि वे उनका व्रत खुलवाने जरूर आएंगे। ये सभी फिल्में न केवल मनोरंजन का जरिया बनीं, बल्कि करवाचौथ की परंपरा को भारतीय जनमानस के बीच और भी लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
