मुजीबुर्रहमान की मौत के बाद परिवार उन्हें सम्मान से आखिरी विदाई देना चाहता था, लेकिन कब्र तक पहुंचने के रास्ते में 4 फीट गहरी उफनती नदी खड़ी थी। आंसुओं के बीच लोगों ने जनाजा कंधों पर उठाया और तेज धार में उतर गए। उमरिया के कंचनपुर की यह तस्वीर उस दर्द को दिखाती है, जहां अंतिम विदाई भी जान जोखिम में डालकर देनी पड़ी।
हाइलाइट्स
- 4 फीट गहरे पानी में जनाजा लेकर नदी पार करते दिखे ग्रामीण
- कब्रिस्तान नदी के दूसरी ओर, बारिश में बढ़ जाता है पानी का बहाव
- ग्रामीणों का दावा रपटा या पुल की मांग लंबे समय से लंबित

जानकारी अनुसार उमरिया के कंचनपुर में एक परिवार को अपने परिजन के जनाजे के लिए भी उफनती नदी से जूझना पड़ा। कब्रिस्तान नदी के दूसरी तरफ है, इसलिए 3 से 4 फीट गहरे पानी और तेज बहाव के बीच लोगों ने जनाजा कंधों पर उठाकर नदी पार कराई। वीडियो वायरल होने के बाद सुरक्षित रास्ते की जरूरत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कंधों पर जनाजा, सामने उफनती नदी
करकेली जनपद पंचायत क्षेत्र के कंचनपुर गांव में मंगलवार को पीपल चौक निवासी मुजीबुर्रहमान की हार्ट अटैक से मौत हो गई। बुधवार को उनका जनाजा कब्रिस्तान ले जाने की बारी आई तो रास्ते में नदी खड़ी थी।
कब्रिस्तान नदी के दूसरी ओर होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को पानी में उतरना पड़ा। करीब 4 से 5 फीट गहरे पानी और तेज बहाव के बीच जनाजा कंधों पर लेकर नदी पार कराया गया।
वायरल वीडियो ने दिखाया जमीनी सच
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इसमें ग्रामीण तेज बहाव के बीच जनाजा लेकर नदी पार करते नजर आ रहे हैं। पानी की गहराई और बहाव के कारण कई लोग नदी पार नहीं कर सके और अंतिम विदाई में शामिल होने से रह गए। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान यह समस्या लगातार गंभीर हो जाती है।
सिर्फ जनाजा नहीं, रोजमर्रा की भी परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर सुरक्षित रपटा या पुल नहीं होने से परेशानी सिर्फ अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है। बारिश में आवागमन प्रभावित होता है और बच्चों, बुजुर्गों तथा मरीजों को भी नदी पार करने में जोखिम उठाना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक नदी पर सुरक्षित रास्ते की मांग कई बार प्रशासन के सामने रखी जा चुकी है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हुआ।
वायरल वीडियो के बाद उठे सवाल
- कब बनेगा नदी पर सुरक्षित रपटा या पुल
- बारिश में ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक रास्ता क्यों नहीं
- पहले की गई मांगों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई
- कब खत्म होगी नदी पार करने की मजबूरी
बांहों की सू मर जाऊंगी…, बालम लायो मेरो फॉर्च्यूनर…फूहड़ गानों पर छात्राओं ने जमकर लचकाई कमरिया, वीडियो वायरल होते ही बढ़ा विवादकंचनपुर का यह वीडियो सिर्फ एक अंतिम यात्रा की तस्वीर नहीं, बल्कि बरसात में ग्रामीण कनेक्टिविटी की चुनौती भी सामने लाता है। ग्रामीणों की मांग है कि नदी पर स्थायी और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की जाए, ताकि किसी परिवार को अपने प्रियजन के अंतिम सफर के लिए भी जान जोखिम में न डालनी पड़े।

