एंटरटेनमेंट डेस्क। एक ऐसी इंडस्ट्री में जहां सुरक्षित दाव लगाना हमेशा बिजनेस में सबसे स्मार्ट मूव माना जाता है, लेकिन प्रोड्यूसर रितेश सिधवानी ने इस चीज को बदलते हुए शुरू से ही अपनी खुद की प्लेबुक लिखने का फैसला किया है।
दरअसल, एक्सेल एंटरटेनमेंट के मास्टरमाइंड दर्शकों की नब्ज़ समझते हैं और इस तरह से उन्होंने हर बार स्टोरी इंडिया के लिए अपनी तेज समझ को दिखाते हुए सही फैसला लिया है। ऐसे में उनके द्वारा हाल ही लिया गया मूव सिर्फ बोल्ड नहीं था बल्कि कुछ ऐसा था जो पहले कभी नहीं हुआ था।
मिर्जापुर को एक फिल्म के रूप में सिल्वर स्क्रीन पर लेकर आने की बात को इंडस्ट्री में मौजूद कई लोगों ने एक हाई स्टेक गैंबल का नाम दिया। वजह यह थी कि मिर्ज़ापुर जो भारत की पसंदीदा और आइकॉनिक स्ट्रीमिंग सीरीज़ में से एक है उसे मेकर्स द्वारा फुल-स्केल फीचर फिल्म में बदलने का काम इंडस्ट्री में पहली बार किसी के द्वारा किया जा रहा था।
रितेश सिधवानी द्वारा अपनाया गया यह रास्ता किसी शो को लाखों दर्शकों के पर्सनल, छोटे स्क्रीन से सिनेमाघरों के शानदार एक्सपीरियंस तक ले जाना एक ऐसा फैसला था जिसे पहले भारत में किसी ने भी नहीं लिया था।
लोगों द्वारा उठाए जाने वाले कई सवालों के बावजूद फिल्म मेकर ने इसमें बड़ा पोटेंशियल देखा। इस तरह से उन्होंने मजबूत किरदारों, कहानी की दुनिया और फ्रेंचाइजी को लेकर अलग लेवल की दीवानी को देखते हुए एक बड़ी छलांग लगाई।
रितेश सिधवानी द्वारा उठाए जाने वाले रिस्क का नतीजा होश उड़ाने वाला रहा। मिर्ज़ापुर: द मूवी ने सिनेमाघरों में अपना दम दिखाया और बॉक्स ऑफिस पर ज़बरदस्त कमाई करते हुए सफलता का स्वाद चखा।
इस तरह यह साफ हो गया कि जब असली इडिया के साथ जबरदस्त कहानी हो तो वह फॉर्मेट से कहीं आगे निकल जाती है।
सिल्वर स्क्रीन पर सिग्नेचर ड्रामा, बड़े पैमाने और कमाल के एक्शन देखने के लिए फैंस पूरी ताकत से आए, जिससे रितेश सिधवानी की पहचान एक ऐसे पायनियर के तौर पर पक्की हो गई, जो इंडस्ट्री के पुराने नियमों को तोड़ने से नहीं डरते।
बता दें कि रितेश सिधवानी के लिए खेल को पूरी तरह से पलट देने वाला रिस्क लेना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने अपनी कल्चर को डिफाइन करने वाली डेब्यू फिल्म ‘दिल चाहता है’ से ही, उन्होंने भारतीय सिनेमा में शहरी कहानियों को पेश करने का तरीका बदल दिया।
एक्सेल एंटरटेनमेंट 20 साल से ज़्यादा समय से उनकी फिल्मोग्राफी और जॉनर-डिफाइनिंग स्टोरीटेलिंग का सबूत है। उन्होंने ‘ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा’ और ‘रॉक ऑन!!’ जैसी बेमिसाल फिल्मों के ज़रिए युवाओं को इंस्पायर किया है, जबकि ‘गली बॉय’ और ‘रईस’ जैसी दमदार, नई राह दिखाने वाली कहानियों को समर्थन भी किया है।
इनके अलावा उन्होंने ‘इनसाइड एज’ और ‘मेड इन हेवन’ जैसी सीरीज़ के साथ इंडियन स्ट्रीमिंग कल्चर को शुरू में ही आकार देना में अहम भूमिका निभाई है।
‘मिर्जापुर’ को सिनेमाघरों में ब्लॉकबस्टर बनाकर रितेश ने सिर्फ एक्सेल एंटरटेनमेंट को एक और बड़ी हिट नहीं दी है, बल्कि भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लिए काम करने का एक नया तरीका भी दिखाया है।
यह इस बात का सबूत है कि जब कोई प्रोड्यूसर बिजनेस की अच्छी समझ के साथ सिनेमा के लिए अपना जुनून भी जोड़ता है, तो बड़े से बड़ा जोखिम भी इतिहास रचने वाली कामयाबी में बदल सकता है।
