Home Box Office41 साल पुरानी तरकीब लगा रहे ‘रामायण’ के मेकर्स, क्या बॉक्स ऑफिस पर फिर दोहराया जाएगा इतिहास?, Bollywood Hindi News

41 साल पुरानी तरकीब लगा रहे ‘रामायण’ के मेकर्स, क्या बॉक्स ऑफिस पर फिर दोहराया जाएगा इतिहास?, Bollywood Hindi News

by BollywoodNewsAndMovie


फिल्म ‘रामायण’ के मामले में मेकर्स बॉलीवुड की 41 साल पुरानी वो रणनीति फॉलो कर रहे हैं, जो एक वक्त पर अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘मर्द’ में लगाई गई थी। दिवाली यूं तो फिल्ममेकर्स की पहली पसंद रहती है। हर डायरेक्टर-प्रोड्यूसर इस मौके पर भारत में अपनी फिल्म रिलीज करना चाहता है, लेकिन ‘रामायण’ के मामले में गणित थोड़ा अलग है। नमित मल्होत्रा की ‘रामायण’ ना तो दिवाली के मौके पर रिलीज हो रही है, और ना ही दिवाली के बाद की छुट्टियों में, जब लोग रिलैक्स होते हैं और बाहर वक्त बिताना चाहते हैं। इसे 5 नवंबर को, यानि दिवाली से 3 दिन पहले रिलीज किया जा रहा है। जिसे आमतौर पर फिल्म की रिलीज के लिए सही वक्त नहीं माना जाता है।

दिवाली के पहले नहीं मिलती अच्छी शुरुआत

ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि दिवाली के थोड़ा पहले लोग आमतौर पर शॉपिंग, घर के कामों या फिर आने-जाने में बिजी होते हैं। दिवाली के दिन भी थिएटर्स में सेलिब्रेशन और लक्ष्मी पूजा के चलते भीड़ कम हो जाती है। तो फिर हजारों करोड़ रुपये खर्च करके बनाई जा रही इस फिल्म को दिवाली से पहले रिलीज करने के पीछे आखिर मेकर्स का प्लान क्या है? इससे पहले दिवाली के मौके पर फिल्मों को रिलीज किए जाने का ट्रेंड और उनके बॉक्स ऑफिस पर नतीजे कैसे रहे हैं? आज यह सब कुछ समझते हैं।

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धीमी शुरुआत, लेकिन फिर लंबी दौड़

असल में ‘रामायण’ के मेकर्स ओपनिंग डे पर बड़ी कमाई करके एवरेज स्पीड पकड़ने की बजाए, मध्यम रफ्तार से शुरूआत करके फिर गोली की रफ्तार से आगे बढ़ना चाहते हैं। इतिहास गवाह रहा है कि जिन फिल्मों के कॉन्टेंट में दम होता है, वो धीमी शुरुआत करने के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर जाती हैं। जहां तक दिवाली से पहले रिलीज किए जाने की बात है तो मेकर्स को शुरुआती कुछ दिन जनता के बीच आफ्टर रिलीज बज बनाने में मदद करेंगे और फिर बज पॉजिटिव रहा तो छुट्टियों में लोग थिएटर्स में यह फिल्म देखने के लिए टूट पडे़ंगे।

अमिताभ की ‘मर्द’ में हुआ था प्रयोग

पहली बार साल 1985 में अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘मर्द’ में यह प्रयोग किया गया था। यह फिल्म दिवाली से चार दिन पहले रिलीज़ हुई थी और अमिताभ बच्चन-मनमोहन देसाई की जोड़ी के क्रेज के कारण पहले ही दिन से सिनेमाघरों में भारी भीड़ उमड़ी। इसके बाद ‘बाजीगर’ (1993), ‘घातक’ (1996), ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (1995) और ‘छोटे मियां बड़े मियां’ (1998) जैसी फिल्मों ने भी यही ट्रेंड फॉलो किया। दिवाली के दिन, या उसके बाद रिलीज करने की बजाए फिल्मों को दिवाली के कुछ दिन पहले रिलीज किया और फिर बॉक्स ऑफिस पर कमाल हो गया।

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क्या है मेकर्स की असली रणनीति?

इसके बाद ‘कृष’ (2013) और ‘हम साथ साथ हैं’ (1999) जैसी फिल्मों ने भी साबित किया कि यह फॉर्मूला असल में काम करता है। फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर एवरेज ओपनिंग मिली, लेकिन फिर जैसे ही फेस्टिव माहौल सेटल डाउन हुआ, बॉक्स ऑफिस पर कमाल हो गया। ट्रेड विशेषज्ञों की मानें तो ओपनिंग डे पर रामायण को 90 करोड़ के आसपास की ओपनिंग मिल सकती है। लेकिन मेकर्स की असली रणनीति मध्यम ओपनिंग पाकर लंबे वक्त में मोटी कमाई करने की है। तो क्या एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर इतिहास दोहराया जाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा।

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