स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। एक्शन और मार्शल आर्ट्स को अपनी पहचान बना चुके अभिनेता विद्युत जामवाल (Vidyut Jammwal) अब हॉलीवुड का रुख कर चुके हैं। वीडियो गेम पर आधारित फिल्म स्ट्रीट फाइटर में वह मशहूर किरदार धालसिम (Dhalsim ) के रूप में नजर आएंगे। उन्होंने अपनी फिल्म, एक्शन की चुनौतियों समेत कई मुद्दों पर की खास बातचीत:
पहला एक्शन सीन शूट करने की क्या यादें हैं?
वही जो घर में मार पड़ती है। कभी बड़ी बहन कभी बड़ा भाई। वहीं से एक्शन की शुरुआत होती हैं। वहीं मार खाते हुए आप इतने ढीठ हो जाते हैं कि मार का असर खत्म हो जाता है। फिल्मों की बात करें तो मैंने दक्षिण भारतीय फिल्म ‘शक्ति’ की थी। उसमें पहली बार मैंने एक्शन किया था।
यह भी पढ़ें- 50 साल पहले Hema Malini ने ‘तवायफ’ बनकर लिया था राजेश खन्ना से बदला, लता मंगेशकर की आवाज में है कल्ट गीत
जब आपका लक्ष्य यही हो और आप फिल्म के सेट पर पहुंच जाते हैं तो अहसास ही नहीं होता कि आप सेट पर पहुंच चुके हैं। वहां पर काम बहुत सामान्य तरीके से हो रहा होता है। धीरे धीरे आप यह आपकी रोजमर्रा जिंदगी बन जाती है, लेकिन आपको वो पल याद रहते हैं कि किसी न किसी ने आपको स्पेशल महसूस कराया होता है। ऐसे कई पल होते हैं हमारी जिंदगी में।
-1791716326544.webp)
स्ट्रीट फाइटर की शूटिंग का पहला दिन कैसा था?
बहुत अच्छा था। उनके सेट काफी ग्रैंड होते हैं। उनका काम करने का तरीका थोड़ा अलग होता है। वहां जिस तरह से चीजों को व्यवस्थित किया जाता है, उससे लोगों का समय बर्बाद नहीं होता। मेरे लिए यह बिल्कुल नया अनुभव था, लेकिन सीखने के लिए बहुत कुछ था। जिस तरह से ये लोग अनुशासन के साथ काम करते हैं, वह काबिले-तारीफ है।
हर कोई अपने तय समय में अपना काम पूरा कर लेता है। यह फिल्म एक वीडियो गेम पर आधारित है, जिसमें दो प्रमुख किरदार केन और रयू हैं। बाकी जितने भी किरदार हैं, वे दुनिया के बेहतरीन फाइटर्स हैं। चाहे आप 50 सेंट, रोमन रेंस या कोडी रोड्स को देखें, वे सभी शानदार भूमिकाओं में हैं।
अपने देश में शूटिंग करते समय कई बार आप क्रिएटिव आजादी ले लेते हैं। वहां पर भी उतनी आजादी होती है? इस वीडियो गेम के आप कितने शौकीन रहे हैं?
शूटिंग से पहले आप अपने निर्देशक से बात करते ही हैं कि यह भी किया जा सकता है। लेकिन जब आप शूटिंग पर होते हैं तो जो तय किया गया होता है वही होता है। मैं इस वीडियो गेम के बारे में जानता था, लेकिन खेला नहीं था। जब मुझे कास्ट किया गया तब मैंने इसे खेलना शुरू किया। फिर समझ आया कि पूरी दुनिया को इसकी लत क्यों लगी है। जब आप किसी किरदार को निभाएंगे तो उस देश की खासियत लेकर आता है जो उनकी सुपरपावर होती है।
-1791716357457.webp)
सेट पर बाकी कलाकारों का भारतीय संस्कृति को लेकर कैसा आकर्षण रहा ?
यह सब बहुत शिक्षित लोग हैं। यह वो लोग हैं जो बहुत बार आकर हिंदुस्तान में परफॉर्म करके जा चुके हैं। हिंदुस्तान को बहुत अच्छी तरह से जानते हैं। यह वो लोग हैं जिनके बड़े बड़े फैन हैं भारत में। हमारी संस्कृति के बारे में जानते हैं। अपनी बात करुं कि मैंने क्या किया तो मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि अगर वो किसी हिंदुस्तानी कलाकार से मिले हैं जिस तरह वो मेरे साथ तसल्ली से मिले वो यह तो बोल पाएंगे कि भारतीय कलाकार खुद को बहुत अच्छी तरह प्रस्तुत करते हैं।
धालसिम ने आपको अपने शरीर के बारे में ऐसी कौन सी नई चीज सिखाई जो आपने पहले नहीं सोची थी?
मुझे पता नहीं था कि अगर मैं अपने बाल उड़ा दूं तो अच्छा दिख सकता हूं। अब मुझे लगता है कि अगर किसी के बाल गिर जाए तो जरूरी नहीं कि हेयर वीविंग की जाए। हो सकता है कि आप अच्छे दिखो। हालांकि मेरे पास गंजा होने का विकल्प था लेकिन निर्माताओं ने विग बनाया था। बाकी जैसा अनुशासित जीवन मैं असल जिंदगी में जीता हूं उसे मुझे शूटिंग के 45 दिन जीना था। यह एक समानता थी।
-1791716387445.webp)
आज के दौर में जब एक्शन फिल्मों में वीएफएक्स बहुत आगे बढ़ चुके हैं, आपको लगता है कि असली स्टंट और वास्तविक शारीरिक मेहनत की अहमियत कम हुई है या बढ़ी है?
वीएफएक्स होने से सुविधा तो है आपके सेफ्टी स्टैंडर्ड बहुत बढ़ जाते हैं। जहां पर चोट लगने की गुंजाइश ज्यादा होती है वो कम की जा सकती है। कई चीजों को नजरअंदाज किया जा सकता है जिसमें हम अधिकतर जोखिम उठाते थे। वो जोखिम काफी कम हो गए हैं तो फायदा होता है काफी।
आपके जीवन की सबसे बड़ी फाइट क्या रही ?
खुद को प्रूफ करना को फाइट नहीं कहूंगा लेकिन एक जिद्दोजहद तो रहती है कि हर चीज में बेहतर बनें चाहे वो आपकी सोच हो या विचार हो या आपका शरीर हो आपका मन या प्रतिक्रियाएं। इसे फाइट नहीं कहूंगा लेकिन यह संघर्ष चलता रहता है।
फोर्स, कमांडो जैसी एक्शन सीरीज की लेकिन कभी लगा नहीं कि इंडस्ट्री ने आपको ड्यू (यथोचित काम) नहीं दिया?
मुझे तो अधिकतर यही लगता है कि जितना मैंने सोचा नहीं था उससे ज्यादा मिला। लोग मुझे आकर कहते हैं कि आपको आपका ड्यू नहीं मिला है इसलिए मुझे वो लोग पसंद हैं क्योंकि उन्हें अधिकतर वो दिखता है जो मैं देखता नहीं हूं। बतौर एक्शन हीरो मैंने बहुत तसल्ली से एक्शन किया है। आज एक हिंदुस्तानी होकर स्ट्रीट फाइटर, जो दुनिया की टॉप फ्रेंचाइज फिल्मों में शुमार होती है उसका हिस्सा बनना बहुत बड़ी बात है। तो अगर देर आए दुरुस्त आए कहते हैं तो सही होगा।
-1791716580090.webp)
आपने तमाम खतरनाक स्टंट किए हैं लेकिन सबसे खतरनाक आपके हिसाब से कौन सा रहा हे?
जब मैं कोई स्टंट करने वाला होता हूं उस समय वो सबसे खतरनाक लगता है। जब वो खत्म हो जाता है तो लगता ही नहीं कि कुछ खतरनाक था। किसी पहाड़ को चढ़ना होता है तो पहले मुश्किल दिखता है, लेकिन ऊपर जाकर लगता है कि आगे और भी जाना है। यह भी उसी तरह है।
शूटिंग के दौरान चोटें खाई?
बिल्कुल नहीं। हॉलीवुड में थोड़ा अलग है। हिंदुस्तान में एक एक्शन शूट करने में हम अगर तीन दिन देते हैं तो वो सात दिन देते हैं। उनके सेफ्टी प्रोटोकॉल थोड़े ज्यादा है। वहां पर अगर हीरो बोलेगा कि मैं यह करना चाहता हूं और उन्हें लगता है कि यह जोखिम भरा है और इससे फिल्म में देरी हो जाएगी तो वो आपको यह नहीं करने देंगे। तो यह स्टैंडर्ड थोड़े हाई हैं।
आपके एक तरफ धालसिम हैं और दूसरी तरफ आपकी अपनी कलरीपयट्टू की दुनिया। अगर दोनों की लड़ने की तकनीक और सोच को मिला दिया जाए, तो सबसे खतरनाक संयोजन क्या बनेगा?
यह मिली हुई है। धालसिम का किरदार योगी है और यह तभी लड़ता है जब आसपास वाले जिन्हें यह प्यार करता है वो परेशान होते हैं। वरना नहीं लड़ता। यही फिलॉसफी मैं जीता भी हूं। यही फिलॉसफी इस गेमिंग किरदार की भी है।
