तिर्वा। राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की बदहाली सामने आ रही है। जनरल वार्ड के शौचालय में गंदगी और जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर रविवार को वायरल होने के बाद व्यवस्था सुधारने के बजाय शौचालय में ताला लगा दिया गया। इसके चलते लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और पुरुषों को महिला शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
तीन दिन पहले जनरल वार्ड में भर्ती एक मरीज के तीमारदार ने शौचालय में फैली गंदगी और जलभराव का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। वीडियो वायरल होने के बाद मेडिकल प्रशासन की जानकारी में मामला आया तो शौचालय की सफाई, जलनिकासी और मरम्मत कराकर उसे दोबारा उपयोग के योग्य बनाने के बजाय ताला लगा दिया गया। नतीजतन, शौचालय की सुविधा से वंचित लोगों को दूसरे विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं। सीएमएस डॉ. दिलीप सिंह ने बताया कि शौचालय मरम्मत का कार्य चल रहा है। ओपीडी स्थित शौचालय को ठीक कराया जा रहा है। जल्द ही सभी शौचालयों को दुरुस्त कराया जाएगा।
एक शौचालय नहीं, पूरे परिसर की व्यवस्था पर सवाल
मेडिकल कॉलेज में शौचालयों की बदहाली किसी एक स्थान तक सीमित नहीं बताई जा रही है। परिसर के कई शौचालयों की हालत जर्जर होने और साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठने से मरीजों और तीमारदारों की परेशानी बढ़ रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों के लिए स्वच्छ शौचालय, नियमित सफाई, पानी की उपलब्धता और सुचारु जलनिकासी जैसी सुविधाएं बुनियादी जरूरत हैं। इनके अभाव में मरीजों को इलाज के दौरान अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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इलाज के साथ मूलभूत सुविधाएं देना भी जिम्मेदारी
मेडिकल कॉलेज में दूरदराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी केवल इलाज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। शौचालय में गंदगी की शिकायत सामने आने के बाद उसे बंद कर देना व्यवस्था सुधारने का स्थायी विकल्प नहीं हो सकता।
